Friday, July 9, 2010

गडकरी जी मजबूत विपक्ष की भूमिका फूहड बयान से नहीं चलेगा।

बीजेपी एक राष्ट्रीय पार्टी है लेकिन उसके अध्यक्ष नितिन गडकरी के बयान बहुत हीं फूहड़ है। उन्होंने 8 जुलाई को एक सभा में कहा कि अफजल गुरू कांग्रेस का दामाद है। क्या कांग्रेस वालों ने उसे अपनी बेटी दी है। इस पर गडकरी जी का कहना है कि वे माफी नहीं मांगेगे। उन्होने जो कहा सही कहा। इस तरह का बयान एक राष्ट्रीय अध्यक्ष के जुबान से अच्छा नहीं लगता। यह कोई पहला मौका नहीं है इससे पहले भी उन्होंने आरजेडी नेता लालू प्रसाद यादव के लिये अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था।

कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला और कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। राजीव शुक्ला का कहना है कि अफजल गुरू संसद हमले का दोषी है। यह घटना जब हुई तब बीजेपी की सरकार थी केंद्र में। तब उन्होंने फांसी पर क्यों नहीं लटका दिया। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि बीजेपी के सम्माननीय अध्यक्ष पूरी तरह से 'मानसिक रोगी' हो गए हैं, इसलिए वे क्या बोल रहे हैं उन्हें खुद नहीं मालूम।

बहरहाल बीजेपी अध्यक्ष गडकरी के इस तरह के बयान से खुद बीजेपी के वरिष्ठ नेता सहमत नहीं है। लेकिन वह खुलकर कुछ नहीं कहना चाहते क्योंकि बीजेपी अध्यक्ष गडकरी आरएसएस के प्रतिनिधि हैं बीजेपी में। बताया जाता है कि एक कॉर्पोरेटर स्तर के नेता को राष्ट्रीय स्तर की पार्टी का अध्यक्ष आरएसएस ने हीं बनवाया।

इसमें गडकरी जी का भी कोई खास दोष नहीं है। क्योंकि वे इस स्तर के नेता होंगे वे कभी सोचे भी नहीं थे। उनका आचरण लोकल स्तर का था उसी स्तर की राजनीति की। वैसे हीं भाषा का इस्तेमाल करने वाले लोग उनके सर्किल में हैं। वे इस तरह की बातचीत के आदि हैं। उन्हें ये सब गलत नहीं लगता। लेकिन अब वे क्या करें। आरएसएस ने उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनवा दिया। वे संभलकर बोलने की कोशिश करते हैं लेकिन औच्छी हरकत की आदी रह चुके गडकरी जी कभी कभी अपने असली रूप में आ जाते हैं। अब उनकी सच्चाई छुप नहीं पाती। क्योंकि राष्ट्रीय स्तर का ओहदा पाने के बाद मीडिया की नजर उनपर हमेशा बनी रहती है और वे अपने बुराइयों के लिये चर्चा में आ जाते हैं।

गडकरी जी आप अपने व्यवहार में सुधार लाये। इस समय देश को एक मजबूत विपक्ष की जरूरत है।

3 comments:

Suresh Chiplunkar said...

मनीष तिवारी तो पागल है, क्या भाजपा के राज में ही अफ़ज़ल की फ़ाँसी सम्बन्धी सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आ गया था? या भाजपा के बनाये हुए राष्ट्रपति फ़ाइल दबाकर बैठ गये थे?

जबकि कांग्रेसी शीला दीक्षित ने 4 साल अफ़ज़ल की फ़ाइल दबाई, अब प्रतिभा पाटिल भी चुपचाप बैठी हैं…

गडकरी के बयान में गलत क्या है, इसे समझाने का कष्ट करें…

Nilkamal said...

Hi Rajesh,

I also don't see any problem in Gadkari jee asking Congress to explain whether Afjal Guru is congress son-in-law or what? Sheila Dixit in public has admitted that Shivraj Patil asked her to delay the Afjal Guru file.I even don't understand Manish Tiwari argument that why he was not hanged in NDA time as NDA was not in power when Supreme Court gave the final verdict.

His earthy humour should also be taken in right spirit and despite of critisizing him about his remarks congress should come clean on Afzal Guru.

राजेश कुमार said...

सुरेश जी और नीलकमल जी, बीजेपी अध्यक्ष गडकरी जी ने कहा कि क्या अफजल गुरू कांग्रेस का दामाद है। क्या कांग्रेस ने अपनी बेटी दे रखी है। इसका अर्थ बेहद एक खराब गाली है। और राष्ट्रीय स्तर पर गाली की भाषा को सही नहीं टहराया जा सकता है।