Thursday, May 6, 2010

जातीय व्यवस्था की शिकार हो गई पत्रकार निरूपमा

अंग्रेजी अखबार बिजनेस स्टैंडर्ड की पत्रकार निरूपमा पाठक जातीय व्यवस्था की शिकार हो गई। दिल्ली में पत्रकारिता करने वाली निरूपमा झारखंड कोडरमा की रहने वाली थी। कोडरमा स्थित उसके घर में मौत हो गई। 29 अप्रैल को उसका शव पंखे से लटका पाया गया। उसकी मौत को आत्महत्या बताया जा रहा था लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद यह साफ हो गया की उसकी हत्या की गई है। वह 10-12 हफ्ते से गर्भवती थी। इस मामले में उसकी मां को गिरफ्तार किया गया है।

इस घटना के पीछे जो बातें सामने आ रही वो बेहद क्रूर है। निरूपमा पाठक जाति से ब्राह्मण थी वो दकियानुसी में विश्वास नहीं करती थी। इसलिये वे अपने पंसद की लडके प्रियभांशु रंजन से शादी करना चाहती थी। उससे प्यार करती थी। वह भी एक न्यूज ऐजेंसी में पत्रकार है। लेकिन उसके परिवार वालों को यह सब पंसद नहीं था। क्योंकि उनके अनुसार लड़का निम्न जाति कायस्त है। निरूपमा के परिवार वाले कायस्त जाति को निम्न जाति का समझते हैं।

पत्रकार निरुपमा पाठक और प्रियभांशु छह मार्च को शादी करने वाले थे। दिल्ली में इसकी पूरी तैयारी कर ली गई थी। शादी के लिए मंदिर में आवेदन दिया जा चुका था। इनकी शादी की जानकारी सिर्फ इनके करीबी दोस्तों को ही थी। दोनों ने इस बात को अपने घरवालों से छिपा रखा था। शादी से ठीक पहले निरुपमा ने प्रियभांशु से कहा था कि कम से कम एक बार घरवालों से इजाजत मांगने की कोशिश कर ली जाए। इसके कुछ दिनों बाद ही निरुपमा के पिता का पत्र आया था।

निरूपमा के परिवार वालों ने उन्हें बहुत समझाया। दिल्ली में खत भी भेजा। उसमें बताया गया कि संविधान को बने सिर्फ साठ साल हुए हैं। जबकि सनातम धर्म सदियों पुराना है। निम्न जाति से शादी करने में संकट पैदा हो सकता है। पाठक परिवार काफी शिक्षित परिवार है लेकिन जातिय व्यवस्था को लेकर वे काफी सचेत हैं। वे कायस्त को निम्न वर्ग का समझते हैं। वर्ण व्यवस्था के तहत कायस्त न तो ब्राह्मण है, न क्षत्रिय है और न वैश्य है ऐसी स्थिति में उनका एक ही स्थान बचता है वह शुद्र। और ब्राह्मण की शादी निम्न वर्ग के साथ नहीं हो सकता है।

समाज में आज भी ऐसी घृणित मानसिकता वाले लोग हैं। मान भी लिया जाये कि कायस्त सनातन धर्म के अनुसार ऊंची जाती में नहीं आता है लेकिन वह ऊंच वर्ग में तो आता हीं है। यदि ऊंच वर्ग में नहीं भी आता तो क्या किसी की हत्या कर दी जायेगी। निरूपमा के मौत ने एक साथ कई सवाल खड़े कर दिये हैं।

3 comments:

गुस्ताख़ मंजीत said...

यह प्रेम की मौत है।

जितेन्द़ भगत said...

दुखद:

संजय बेंगाणी said...

जाती धर्म के आधार पर विरोध जरूर होता है मगर बेटी की हत्या....कभी सुना देखा नहीं. बहुत गलत हुआ.