देश के कई राज्यों में फैले नस्कलवादियों से मुकाबला करने के लिये केन्द्र सरकार ने कोबरा (कॉम्बैट बटालियन रेजन्यूट एक्शन) नामक एक विशेष सुरक्षा बल गठन करने को हरि झंडी दे दी है। इसमें दस बटालियन होंगे और हर बटालियन में एक हजार जवान होंगे। यानी कोबरा में कुल दस हजार जवान होंगे।
‘कोबरा’ के गठन पर लगभग 14 सौ करोड़ रूपए की लागत आयेगी। इस पर केन्द्र सरकार पिछले कई महिनों से विचार विमर्श कर रही थी। बताया गया है कि ‘कोबरा’ के गठन के कुल बजट का लगभग 900 करोड़ रुपए ज़मीन ख़रीदने और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास पर ख़र्च किए जाएँगे। जबकि लगभग 400 करोड़ रुपए जवानों के प्रशिक्षण पर ख़र्च किए जाएँगे।.
बहरहाल जब तक कोबरा की टीम तैयार नहीं हो जाती है तब तक सीआरपीएफ़ की दस बटालियनें सुरक्षा व्यवस्था में लगी रहेगी. आंध्र प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी के दुर्गा प्रसाद को को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन्हें नक्सलवादियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाने का सफल अनुभव है। मुख्य रूप से जो राज्य प्रभावित हैं उनमें झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, छतिसगढ, आंध्र प्रदेश, उड़िसा, महाराष्ट्र हैं।
अभियान के दौरान कोबरा के कमांडों को यह भी सिखाना चाहिये कि कोई निर्दोष न मारा जाये। आम तौर पर देखा यही गया है कि नक्सवाद के सफाई अभियान के नाम पर निर्दोष ग्रामिण को मार गिराया गया है।
Friday, August 29, 2008
Wednesday, August 27, 2008
शिबू सोरेन दूसरी बार बने झारखंड के मुख्यमंत्री
झारखंड मुक्ति मोर्चा ( झामुमो) के अध्यक्ष शिबू सोरेन ने आज झारखंड के मुख्यमंत्री पद और गोपनियता की शपथ ली। राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान पर श्री सोरेन के अलावा 11 अन्य मंत्रियों ने भी पद और गोपनियता की शपथ ली। अन्य शपथ लेने वाले मंत्रियों में सुधीर महतो (झामुमो), नलिन सोरेन (झामुमो) , दुलाल भुइंया (झामुमो) , स्टीफन मरांडी ( निर्दलीय), एनोस इक्का ( निर्दलीय ), हरिनारायण राय ( निर्दलीय), जोबा मांझी (निर्दलीय), बंधु तिर्की, ( निर्दलीय), भानू प्रताप शाही (निर्दलीय), कमलेश कुमार सिंह (एनसीपी), अपर्णा सेनगुप्ता ( फॉरवर्ड ब्लॉक) शामिल हैं।श्री सोरेन को एक सितंबर तक बहुमत सिद्ध करना है। 82 सदस्यीय विधान सभा में इस समय कुल 81 सदस्य हैं। एक सीट खाली है क्योंकि जेडीयू विधायक रमेश सिंह मुंडा की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। श्री सोरेन के पास इस समय विधायकों की संख्या 42 है जो कि बहुमत से एक अधिक है। श्री सोरेन का दावा है कि बहुमत के दौरान उन्हें 42 से भी अधिक मत मिंलेगे। बताया जा रहा है कि भाजपा से नाराज तीन विधायक जो झारखंड विकास मोर्चा में चले गये थे वे श्री सोरेन को समर्थन कर करेंगे।
राज्य के मुख्यमंत्रियों के नाम – बाबू लाल मंराडी(झारखंड के पहले मुख्यमंत्री 15 नवंबर,2000 से 18 मार्च 2003 तक), अर्जुन मुंडा( 18 मार्च 2003 से 2 मार्च 2005 तक), शिबू सोरेन(2 मार्च 2005 से 12 मार्च 2005 तक), अर्जुन मुंडा (12 मार्च 2005 से 18 सितंबर 2006 तक), मधु कोडा (18 सितंबर 2006 से 27 अगस्त 2008 तक) और शिबू सोरेन( 18 सितंबर 2008 से ....) ।
Monday, August 25, 2008
शिबू सोरेन होंगे झारखंड का अगला मुख्यमंत्री
राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू यादव के रांची पहुंचते हीं झारखंड की राजनीति की फिजा़ बदल गई। शिबू सोरेन(गुरूजी) का अब मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है। नाराज निर्दलीय विधायक भी मान गये हैं। अब वे झामुमो नेता गुरुजी को अपना मुख्यमंत्री मानने के लिये तैयार हो गये। निर्दलीय विधायक और राज्य के मुख्यमंत्री मधु कोडा और उप मुख्यमंत्री प्रो स्टीफन मरांडी जो गुरूजी को समर्थन देने से इंकार करते रहे अब वे गुरूजी को अपना मुख्यमंत्री मानने के लिये तैयार हैं।दावा किया जा रहा है कि गुरूजी के समर्थन में कुल 45 विधायक हैं। इसमें झामुमो के 17, कांग्रेस के 09, राजद के 07 इनकी कुल संख्या 33 है। निर्दलीय विधायकों में – मधु कोडा, स्टीफन मरांडी, हरिनारायण राय, भानू प्रताप शाही (फारवर्ड ब्लॉक), चंद्र प्रकाश चौधरी(आजसू), एनसीपी के कमलेश सिंह(1), यूजीडीपी के 2. इनकी संख्या आठ है। यूपीए के पास कुल 41 विधायक हैं। जो पहले था वो अब भी है। इसके अलावा भाजपा से नाराज होने के बाद तीन विधायक जो झारखंड विकास पार्टी में चले गये थे वे भी गुरूजी को समर्थन कर सकते हैं।
राजनीतिक ऊहपोह में राष्टपति शासन की ओर बढ रही झारखंड में एक बार फिर यूपीए की सरकार शिबू सोरेन के नेतृत्व में बनने जा रही है। जैसे ही खबर फैली की भाजपा भी झारखंड में सरकार बनाने की कोशिश में जुट गई है वैसे हीं राजद नेता लालू यादव दिल्ली से रांची पहुंचे और सारी अटकलें और सभी लोगों की गिलासिकवा को दूर कर गुरूजी के मुख्यमंत्री बनने की राह आसान कर दी।
Sunday, August 24, 2008
झामुमो-निर्दलीय की लड़ाई में भाजपा की गिद्ध दृष्टि
झारखंड मुक्ति मोर्चा के दबाव और यूपीए के वरिष्ठ नेता की सलाह पर आखिरकार झारखंड के मुख्यमंत्री मधुकोड ने इस्तीफा दे दिया। लेकिन राज्यपाल सिब्ते रजी ने मधुकोडा से कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में तब तक काम करने को कहा जब तक दूसरी व्यवस्था न हो जाये।
इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री मधुकोडा ने ऐलान किया है कि वो न तो दूसरे मंत्रिमंडल में मंत्री बनेंगे और न हीं झामुमो नेता शिबू सोरेन को समर्थन करेंगे। आगे की रणनीति पर काम करने के लिये निर्दलीय मंत्रियों की बैठक लगातार जारी है। बैठक अलग अलग जगहों पर की जा रही है। बैठक में मधुकोडा के अलावा निर्दलीय विधायकों में जो मंत्री भी थे – प्रो स्टीफन मरांडी, चंद्र प्रकाश चौधरी, हरि नारायण राय, जोबा मांझी और भानू प्रताप शाही शामिल हैं।
यदि ये विधायक एकजुटता दिखाते हुए झामुमो नेता श्री सोरेन को समर्थन नहीं देते हैं तो यूपीए की सरकार बनना मुश्किल है। श्री कोडा कहते रहे हैं कि पिछले 23 महीने से सरकार बढिया चर रही थी तो आखिर मुख्यमंत्री बदलने का अर्थ क्या है ?
उधर श्री सोरेन ने कहा कि वे अपने निर्दलीय विधायको को मना लेंगे। क्योंकि वे सभी उनके अपने हैं। बहरहाल, झारखंड की राजनीतिक संस्पेंस बना हुआ है। यदि निर्दलीय विधायकों ने समर्थन नहीं दिया तो झारखंड की राजनीति में नया मोड आ सकता है। इस बीच खबर है कि भाजपा ने भी यूपीए की राजनीति में रुची दिखाना शुरू कर दिया है। भाजपा को लग रहा है कि झामुमो और निर्दलीय विधायको की लड़ाई में जो भी खेमा नाराज होगा। हो सकता है कि नई परिस्थिति में वे झारखंड में सरकार बना सकते हैं।
खबर है कि रेल मंत्री और राजद नेता लालू प्रसाद यादव रांची पहुंचने वाले हैं।
इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री मधुकोडा ने ऐलान किया है कि वो न तो दूसरे मंत्रिमंडल में मंत्री बनेंगे और न हीं झामुमो नेता शिबू सोरेन को समर्थन करेंगे। आगे की रणनीति पर काम करने के लिये निर्दलीय मंत्रियों की बैठक लगातार जारी है। बैठक अलग अलग जगहों पर की जा रही है। बैठक में मधुकोडा के अलावा निर्दलीय विधायकों में जो मंत्री भी थे – प्रो स्टीफन मरांडी, चंद्र प्रकाश चौधरी, हरि नारायण राय, जोबा मांझी और भानू प्रताप शाही शामिल हैं।
यदि ये विधायक एकजुटता दिखाते हुए झामुमो नेता श्री सोरेन को समर्थन नहीं देते हैं तो यूपीए की सरकार बनना मुश्किल है। श्री कोडा कहते रहे हैं कि पिछले 23 महीने से सरकार बढिया चर रही थी तो आखिर मुख्यमंत्री बदलने का अर्थ क्या है ?
उधर श्री सोरेन ने कहा कि वे अपने निर्दलीय विधायको को मना लेंगे। क्योंकि वे सभी उनके अपने हैं। बहरहाल, झारखंड की राजनीतिक संस्पेंस बना हुआ है। यदि निर्दलीय विधायकों ने समर्थन नहीं दिया तो झारखंड की राजनीति में नया मोड आ सकता है। इस बीच खबर है कि भाजपा ने भी यूपीए की राजनीति में रुची दिखाना शुरू कर दिया है। भाजपा को लग रहा है कि झामुमो और निर्दलीय विधायको की लड़ाई में जो भी खेमा नाराज होगा। हो सकता है कि नई परिस्थिति में वे झारखंड में सरकार बना सकते हैं।
खबर है कि रेल मंत्री और राजद नेता लालू प्रसाद यादव रांची पहुंचने वाले हैं।
Monday, August 18, 2008
झारखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने की तैयारी
झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्थन वापस लेने के बावजूद मुख्यमंत्री मधुकोडा ने दावा किया कि वे सदन में बहुमत सिद्ध कर देंगे। हालांकि आंकड़े उनके खिलाफ है। वास्तविकता यही है कि राज्य सरकार अल्पमत में आ गई है। जिस राज्य में सरकार बनाने और गिराने के लिये एक-दो विधायकों का हीं वोट काफी है वहां झामुमो के 17 विधायक के अलग होने से बहुमत कैसे सिद्ध किया जा सकता है।
आईये एक नजर डालते हैं मधुकोडा सरकार के पक्ष और विरोध में –
मधुकोडा सरकार के विरोध में - भाजपा – 29(इसमें भाजपा के पांच नाराज विधायक भी शामिल हैं), जदयू – 04, इंदर सिंह नामधारी, आजसू (सुदेश महतो) – 01, निर्दलीय -01, फारवर्ड ब्लॉक(अपर्णा सेन गुप्ता) – 01, भाकपा – 01, भाकपा माले – 01, मनोनीत(गोलेस्टीन) – 01 और झामुमो – 17 । इन आंकडो को देखे तो मधुकोडा सरकार के खिलाफ कुल 56 मत हैं।
मधुकोडा सरकार के पक्ष में - कांग्रेस – 09, राजद – 07, यूजीडीपी – 02, फारवर्ड ब्लॉक (भानू प्रताप शाही) – 01, आजसू (चंद्रप्रकाश चौधरी) – 01, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – 01, झारखंड पार्टी – 01, मधु कोडा (निर्दलीय) – 01, स्टीफन मरांडी(निर्दलीय) – 01, हरिनारायण राय – 01 । इन आंकड़ो को देखें तो कुल संख्या 25 है।
बहरहाल झारखंड विधान सभा में 81 सदस्य चुनाव जीत कर पहुंचते है और एक मनोनीत होकर। कुल 82 सदस्य है। यहां सभी सदस्यों को वोट करने का अधिकार है। लेकिन यदि वोट भी होता है तो 81 मत ही होगें क्योंकि जदयू विधायक रमेश सिंह मुंडा की हत्या हो चुकी है।
बहरहाल झारखंड की राजनीति उलझी हुई है। फारवर्ड ब्लॉक और आजसू के दो-दो विधायक हैं और दोनो हीं दलो के एक- एक विधायक सरकार के पक्ष में है तो एक-एक विरोध में। भाकपा माले के एक विधायक है विनोद सिंह वे मधुकोड़ा सरकार के खिलाफ है लेकिन भाजपा के साथ भी नही्। झामुमो का यदि 17 विधायक एनडीए के साथ चला जाये तो भाजपा को निर्दलीय विधायकों की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। लेकिन ऐसा लगता नहीं है। कारण झामुमो अपना मुस्लिम वोट बैंक खोना नहीं चाहेगा। इतना हीं नहीं दोनो हीं दलो को डर है कि भाजपा-झामुमो गठबंधन से दोनो ही दल कही टूट न जाये। ऐसे आसार से इंकार नहीं किया जा सकता।
इस बीच दिल्ली से खबर आ रही है कि झारखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने की तैयारी हो रही है। कांग्रेस पार्टी नहीं चाहती है कि सत्ता के लिये जिस प्रकार पहले भागम भाग झारखंड में हुआ उसी प्रकार इस बार भी हो। भाजपा भी नये सिरे से चुनाव कराने की मांग कर रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मधुकोडा की सरकार से अपना नाता तोड़ा है यूपीए से नहीं। इस हालात में कोई भी राजनीतिक दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है।
आईये एक नजर डालते हैं मधुकोडा सरकार के पक्ष और विरोध में –
मधुकोडा सरकार के विरोध में - भाजपा – 29(इसमें भाजपा के पांच नाराज विधायक भी शामिल हैं), जदयू – 04, इंदर सिंह नामधारी, आजसू (सुदेश महतो) – 01, निर्दलीय -01, फारवर्ड ब्लॉक(अपर्णा सेन गुप्ता) – 01, भाकपा – 01, भाकपा माले – 01, मनोनीत(गोलेस्टीन) – 01 और झामुमो – 17 । इन आंकडो को देखे तो मधुकोडा सरकार के खिलाफ कुल 56 मत हैं।
मधुकोडा सरकार के पक्ष में - कांग्रेस – 09, राजद – 07, यूजीडीपी – 02, फारवर्ड ब्लॉक (भानू प्रताप शाही) – 01, आजसू (चंद्रप्रकाश चौधरी) – 01, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – 01, झारखंड पार्टी – 01, मधु कोडा (निर्दलीय) – 01, स्टीफन मरांडी(निर्दलीय) – 01, हरिनारायण राय – 01 । इन आंकड़ो को देखें तो कुल संख्या 25 है।
बहरहाल झारखंड विधान सभा में 81 सदस्य चुनाव जीत कर पहुंचते है और एक मनोनीत होकर। कुल 82 सदस्य है। यहां सभी सदस्यों को वोट करने का अधिकार है। लेकिन यदि वोट भी होता है तो 81 मत ही होगें क्योंकि जदयू विधायक रमेश सिंह मुंडा की हत्या हो चुकी है।
बहरहाल झारखंड की राजनीति उलझी हुई है। फारवर्ड ब्लॉक और आजसू के दो-दो विधायक हैं और दोनो हीं दलो के एक- एक विधायक सरकार के पक्ष में है तो एक-एक विरोध में। भाकपा माले के एक विधायक है विनोद सिंह वे मधुकोड़ा सरकार के खिलाफ है लेकिन भाजपा के साथ भी नही्। झामुमो का यदि 17 विधायक एनडीए के साथ चला जाये तो भाजपा को निर्दलीय विधायकों की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। लेकिन ऐसा लगता नहीं है। कारण झामुमो अपना मुस्लिम वोट बैंक खोना नहीं चाहेगा। इतना हीं नहीं दोनो हीं दलो को डर है कि भाजपा-झामुमो गठबंधन से दोनो ही दल कही टूट न जाये। ऐसे आसार से इंकार नहीं किया जा सकता।
इस बीच दिल्ली से खबर आ रही है कि झारखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने की तैयारी हो रही है। कांग्रेस पार्टी नहीं चाहती है कि सत्ता के लिये जिस प्रकार पहले भागम भाग झारखंड में हुआ उसी प्रकार इस बार भी हो। भाजपा भी नये सिरे से चुनाव कराने की मांग कर रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मधुकोडा की सरकार से अपना नाता तोड़ा है यूपीए से नहीं। इस हालात में कोई भी राजनीतिक दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है।
Saturday, August 16, 2008
गिरिडीह से राजकिशोर महतो को लोक सभा टिकट देने की मांग
गिरिडीह से नंदशाह की रिपोर्ट -धनबाद जिले के सिंद्री से भाजपा विधायक राजकिशोर को गिरिडीह संसदीय क्षेत्र से टिकट देने की मांग जोर पकड़ते जा रही है। गिरिडीह के धनवार, बगोदर, गाण्डेय, डूमरी, जमूआ और टूंडी के अलावा धनबाद और हजारीबाग से भी लोगों ने राजकिशोर के समर्थन में उतर आये हैं।
विशाल (गिरिडीह ) – राजकिशोर महतो को यदि टिकट दिया जाता है तो उनका चुनाव जितना तय है।
अरूण अग्रवाल (गिरिडीह ) – मैं भाजपा को वोट देता आया हूं। भाजपा से जो भी होगा उसे हीं वोट करूंगा।
दुलाल महतो(गिरिडीह) – झामुमो से जुड़ा हूं। लेकिन राजकिशोर दादा को टिकट देने के बाद मुझे उन्हें हीं वोट करना होगा।
विजय महतो(गिरिडीह) – राजकिशोर दादा को टिकट मिलता है तो कुछ सोचना हीं नहीं हैं। वोट उन्हें ही करेंगे।
मोहित रवानी (धनबाद) – मैं तो धनबाद का हूं। ऐसा सुन रहा हूं कि वे गिरिडीह से लोक सभा चुनाव लड़ने वाले हैं। वे गिरिडीह से सांसद भी रह चुके हैं। उन्हें टिकट मिलने से उनके साथ हर प्रकार के वोटर जुड़ जायेंगे।
रंगनाथ तिवारी(गिरिडीह) – राजकिशोर महतो के साथ दो तरह की बाते हैं वे काफी पढे-लिखे हैं और मास लीडर हैं। उनके साथ सभी समुदाय के लोग जुड़े हैं।
राजकिशोर महतो को टिकट देने की मांग जोर पकडते जा रही है। झारखंड के लिये कई सीटों के लिये उम्मीदवारों की घोषणा भाजपा कर चुकी है सभी लोगो की दिलचस्पी गिरिडीह और धनबाद सीट को लेकर है। इस बाबत राजकिशोर महतो से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन बातचीत नहीं हो पाई।
Thursday, August 14, 2008
स्वतंत्रता दिवस की शुभ कामनायें - वतन भाई हूं

मैं भी इसी देश का निवासी हूं
मेरे भविष्य के बारे में कौन सोचेगा?
मेरे पास धन नहीं
स्कूल में नाम लिखवाने के पैसे नहीं
पढना चाहता हूं ।
भूख लगी है रोटी नहीं।
मां के आंसू से पेट नहीं भरता।
मैं आपका वतन भाई हूं, पुत्र हूं
देश में जितनी भाषाएं हैं
जितनी जातियां हैं जितने धर्म हैं
उतने हीं मेरे नाम हैं।
झगडे कहां नहीं होते
विश्व-देश-राज्य-जिला-कस्बा-परिवार
हर जगह झगडें हैं।
लड़ना चाहो तो हजार बहाने
मिलकर रहना चाहो तो हर राह हमारी है।
मेरे लिये रास्ता कब बनेगा
मैं, मैं नहीं, हम के लिये
आपसे आगाज़ कर रहा हूं।
मेरा तो अपना कुछ भी नहीं था
सब कुछ इसी धरती पर मिला
लेकिन राह नहीं मिला
राह तो आप ही बनाओगे।
राह के बनते ही
देश का विकास तय है
कस लो कमर
और लगे रहो
देश को श्रेष्ठतर बनाने में ।
जरूरत है योजनाबद्ध शिक्षा, विकास
और सही दिशा में सोच की।
यदि कुछ कर गुजरने की तमन्ना है
तो जागो, उठो, संकोच छोड़ो
और उज्ज्वल भविष्य की परिकल्पनाओं के लिए
ईमानदार कोशिश करो।
बस जरूरत है उस ईमान की
जो देश को कर सके रोशन।
जय हिंद
स्वतंत्रता दिवस की शुभ कामनायें।
राजेश कुमार ।
मेरे भविष्य के बारे में कौन सोचेगा?
मेरे पास धन नहीं
स्कूल में नाम लिखवाने के पैसे नहीं
पढना चाहता हूं ।
भूख लगी है रोटी नहीं।
मां के आंसू से पेट नहीं भरता।
मैं आपका वतन भाई हूं, पुत्र हूं
देश में जितनी भाषाएं हैं
जितनी जातियां हैं जितने धर्म हैं
उतने हीं मेरे नाम हैं।
झगडे कहां नहीं होते
विश्व-देश-राज्य-जिला-कस्बा-परिवार
हर जगह झगडें हैं।
लड़ना चाहो तो हजार बहाने
मिलकर रहना चाहो तो हर राह हमारी है।
मेरे लिये रास्ता कब बनेगा
मैं, मैं नहीं, हम के लिये
आपसे आगाज़ कर रहा हूं।
मेरा तो अपना कुछ भी नहीं था
सब कुछ इसी धरती पर मिला
लेकिन राह नहीं मिला
राह तो आप ही बनाओगे।
राह के बनते ही
देश का विकास तय है
कस लो कमर
और लगे रहो
देश को श्रेष्ठतर बनाने में ।
जरूरत है योजनाबद्ध शिक्षा, विकास
और सही दिशा में सोच की।
यदि कुछ कर गुजरने की तमन्ना है
तो जागो, उठो, संकोच छोड़ो
और उज्ज्वल भविष्य की परिकल्पनाओं के लिए
ईमानदार कोशिश करो।
बस जरूरत है उस ईमान की
जो देश को कर सके रोशन।
जय हिंद
स्वतंत्रता दिवस की शुभ कामनायें।
राजेश कुमार ।
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