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Thursday, October 15, 2009

अपने वेतन में कटौती का फैसला किया मुकेश अंबानी ने

देश के जानेमाने उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रमुख मुकेश अंबानी ने अपने वेतन में दो तिहाई कटौती करने का फैसला किया है। जीवन में सादगी को प्राथमिकता देने वाले मुकेश अंबानी ने मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के वेतन में कमी लाने के लिए चल रही बहस के बीच एक उदाहरण पेश करने का फैसला किया है।

मुकेश अंबानी ने इस ओर इसलिये पहल की है क्योंकि देश के कंपनी मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा था कि सीईओ स्तर के अधिकारियों को अपने वेतन के बारे में सोचना चाहिये। मुकेश अंबानी के इस फैसले के बाद अब उन्हें एक साल में सिर्फ 15 करोड़ रुपये का पैकेज मिलेगा जबकि उनका पैकेज 44 करोड़ का था।

आरआईएल के सीईओ मुकेश अंबानी के इस फैसले के बाद उनका वेतन अन्य कंपनयों के सीईओ के वेतन से भले हीं कम हो जायेगा लेकिन उन्होंने जो यह कदम उठाया है वह आने वाले दिनों में एक मिसाल कायम करेगा।

Sunday, October 7, 2007

चक दे इंडिया से मुकेश अंबानी भी प्रभावित

शाहरुख खान की फिल्म ‘चक दे इंडिया’ की जबरदस्त धून ‘चक दे इंडिया’ ने जहां खेल जगत में जान फूंक दी वहीं औधोगिक जगत भी अब इससे प्रभावित हो रहा है। रिलांयसस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने कहा है कि अब उधोग जगत में भी चक दे इंडिया की भावना आनी चाहिये। उन्होंने कहा कि इस भावना ने अंतराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी टूर्नामेंट में चाहे क्रिकेट हो या हॉकी दोनो ही टीमों को जोश से भर दिया और हमारी टीमें विययी हुई। मुकेश अंबानी ने कहा कि विज्ञान और प्रौधोगिकी के क्षेत्र में रचनात्मक काम करने से लाखों भारतीय के जीवन में गुणात्मक परिवर्तन किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि चक दे इंडिया की भावना से काम किया तो हर क्षेत्र में देश की प्रगती होगी और भारत को अंतरराष्ट्रीय महाशक्ति बनाया जा सकता है।

Tuesday, August 28, 2007

योग्य उत्तराधिकारी की खोज : रतन टाटा

टाट समूह के चेयरमैन रतन टाटा ने कहा है कि यदि कोई योग्य उत्तराधिकारी मिल जाता है तो वह पद छोड़ने को तैयार है हालांकि नियमानुसार वो अभी 5 साल तक अपने पद पर बने रह सकते हैं। लेकिन उन्होंने पद छोड़ने का संकेत दे कर कंपनी के प्रति साकारात्मक रुख अपनाया। भारत के प्रमुख उद्योग घराने टाटा समूह ने पूरी दुनियां में अपनी छाप छोड़ी है। रतन टाटा ने अपने पिछले 16 साल के कार्यकाल में दुनियां की कई बड़ी कंपनियों का अधिग्रहण किया।
रतन टाटा ने 1991 में टाटा समूह की बागडोर संभाली थी। टाटा समूह के अंतर्गत 96 कंपनियां हैं और कर्मचारियों की संख्या लगभग 2.46 लाख है। उन्होने ने कहा कि हो सकता है कि एक समय टाटा का नाम भारत की तुलना में देश से बाहर अधिक हो। उन्होंने यह भी कहा कि कोरस अधिग्रहण करने के बाद उनका राजस्व 30 प्रतिशत से बढकर 50 प्रतिशत तक का राजस्व देश के बाहर से आयेगा।
टाटा मोटर्स के सिंगुर प्रोजेक्ट मामले को लेकर हुये आंदोलन और दिक्कतों के बारे में उनता कहना है कि जिन लोगों का भूमि अधिग्रहण किया गया है उन्हें परियोजना में हिस्सेदारी देने पर विचार किया जा रहा है। और उन्होंने उम्मीद जतायी कि पीपल्स कार 2008 के मार्च तक बाजा़र में आ जायेगा।

Sunday, August 26, 2007

झारखंड की शान है टाटा

प्रदीप खेमका
जमशेदपुर में टाटा स्टील की स्थापना जमशेदजी टाटा ने वर्ष 1907 में की। आज यह कंपनी पूरी दुनियां में छाई हुई है। साथ हीं देश का नाम भी पूरी दुनियां में रोशन किया टाटा ने खासकर व्यापार जगत के क्षेत्र में। जिस समय टाटा कंपनी की स्थापना की गई थी उस समय देश में अंग्रेजों का शासन था। व्यापार करना उनके लिये उतना आसान नहीं था जितना आज है पर उन्होंने हर समस्याओं का सामना किया। इतना हीं नहीं वे स्वतंत्रता सेनानियों की भी मदद करते रहे। जमशेदजी टाटा के छोटे पुत्र सर रतनजी जमशेदजी नुसुरवनजी टाटा ने 1910 में बापू को रंगभेदी नीति के खिलाफ चलाये जा रहे आंदोलन के लिये सवा लाख रुपये दिये थे।उनकी सोच मानवीय और विश्वव्यापी थी।
जमशेदजी ने जब टाटा समूह का गठन किया था तभी उन्होंने अपनी कंपनी के बारे में एक ऐसा मॉडल तैयार कर लिया था जो मानवीय और विश्वस्तरीय हो।उन्होंने अपने कर्मचारियों के लिये 8 घंटे की शिफ्ट तय की। ऐसा देश में पहली बार हुआ था। वर्तमान में टाटा समूह के पास 96 कंपनियां हैं और टाटा स्टील उन्हीं कंपनियों में से एक है। यह समूह अब प्रत्येक वर्ष 20 अरब डॉलर से अधिक का कारोबार करता है। विश्वस्तरीय स्टील,चाय,वाहन(ट्रक,बस,कारे) बनाने के अलावा टाटा समूह ने फॉन कॉल के लिये समुद्र के नीचे फ़ाइबर ऑप्टिक केबल भी बिछाये। ये काम आसान नहीं था। तकनीकी संचार के क्षेत्र में टाटा समूह ने 50साल पहले ही क्रांति कर दी थी।
टाटा समूह ने अपनी कंपनी को एक ऐसे ब्रांड में बदल दिया है जिसपर देश के लोग आंख मुंद कर विश्वास करते है। अपनी ठोस नीति और विश्वास के कारण हीं टाटा समूह ने अपनी कंपनी को विश्व भर में फैला दिया। विश्व भर में फैले टाटा कंपनियों की एक सूची -
वर्ष 2000(फरवरी)- ब्रिटेन की टेटली कंपनी को खरीदा 1870 करोड़ रुपए में टाटा टी ने।
वर्ष 2004(मार्च) – देवू कमर्शियल वेहिकल्स(कोरिया) का 459 करोड़ रुपए में अधिग्रहण।
वर्ष 2004(अग्स्त)-टाटा स्टील ने नैटस्टील (सिंगापुर) को खरीदा 1300 करोड़ रुपए में।
वर्ष 2005(जुलाई)- टेलीग्लोब इंटरनेशनल का 239 मिलियन डॉलर में अधिग्रहण।
वर्ष 2005(अक्टूबर)-टाटा टी ने 3 करोड़ 20 लाख डॉलर में गुड अर्थ क्राप का अधिग्रहण।
वर्ष 2005(अक्टूबर)- ब्रिटेन के आईएनसीएटी इंटरनेशनल को 411 करोड़ रुपए में खरीदा.
वर्ष 2005(अक्टूबर)- टाटा कंसल्टेंसी ने सिडनी स्थित कंपनी एफएनएस को अधिग्रहित किया.
वर्ष 2005(नवंबर)- बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग कंपनी कोमीकॉर्न को क़रीब 108 करोड़ में खरीदा.

वर्ष 2005(दिसंबर)- थाईलैंड की मिलेनियम स्टील का 1800 करोड़ रुपए में अधिग्रहण।
वर्ष 2005(दिसंबर)- ब्रिटेन की ब्रूनर मोंड ग्रुप के 63.5 प्रतिशत शेयर खरीदे
वर्ष 2006(जून)- अमरीकी कंपनी 8 ओक्लॉक कॉफी कंपनी का क़रीब 1000 करोड़ रुपए अधिग्रहण ।
वर्ष 2006(अगस्त) -अमरीकी कंपनी ग्लेसॉ(एनर्जी कंपनी) के 30 प्रतिशत शेयर खरीदे. क़ीमत अदा की गई 67 करोड़ डॉलर।
बहरहाल, टाटा समूह साल के शुरुआत में जबरदस्त सुर्खियों मे था जब कोरस कंपनी को खऱीद लिया गया। एक मील का पत्थर माना जा रहा है टाटा- कोरस का समझौता। समझौते में यह तय हुआ कि कंपनी का नाम कोरस ही रखा जायेगा। अब इस कोरस कंपनी का मालिक टाटा समूह हो गया है। टाटा समूह ने एंग्लो-डच इस्पात कंपनी कोरस को नौ अरब डॉलर में ख़रीद।इस सौदे के बाद टाटा दुनियां की पाँचवी सबसे बड़ी इस्पात कंपनी बन गई है।टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा ने इसे एक 'रोमांचक क्षण' बताया है.उन्होंने कहा कि "कोरस को ख़रीदना हमारी विस्तार योजना के अनुरूप है जिसके तहत हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ रहे हैं।"उन्होंने कहा कि दोनों हीं कंपनियों की गौरवपूर्ण इतिहास रही है। इस सौदे से कोरस के चेयरमैन जिम लेंग भी काफ़ी ख़ुश हैं।