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Friday, June 25, 2010

शिक्षा के क्षेत्र में के.सी.श्रीवास्तव का उल्लेखनीय योगदान, कोल इंडिया के ब्रांड एम्बेस्डर बने।

धनबाद डी.ए.वी पब्लिक स्कूल, कोयला नगर के प्रिंसिपल कैलाश चंद्र श्रीवास्तव की जितनी तारीफ की जाये कम होगा। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्य को देखते हुए कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन पार्थों भट्टाचार्य ने श्री श्रीवास्तव को कोल इंडिया लिमिटेड का ब्रांड एम्बेस्डर नियुक्त किया है।

चंडीगढ के शिवालिक पब्लिक स्कूल से बतौर एक शिक्षक कैरियर की शुरवात करने वाले श्री श्रीवास्तव आज शिखर पर हैं। वे डीएवी में प्रिसिंपल होने के साथ साथ निदेशक के पद पर भी हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि उनका मकसद हमेशा शिक्षा को आगे बढाने का रहा है। अपने स्कूल के छात्रों के प्रति उनका हमेशा विशेष लगाव रहा है। उनकी कोशिश होती है कि उनके स्कूल का हर छात्र अपने-अपने क्षेत्र के सर्वोच्च स्थान पर पहुंचे। उनके नेतृत्व में अबतक हजारों छात्रों ने इंजीनियरिंग, मेडिकल, टैक्नोलॉजी और फैशन डीजाइन आदि के क्षेत्र में सफलता अर्जित की है।

श्री श्रीवास्तव 1990 में डीएवी ऑर्गेनाइजेशन में आये थे बतौर प्रोजेक्ट स्कूल के प्रिंसिपल के रूप में। तब से लेकर वे लगातार आगे बढते रहे। कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। उनके त्याग को देखते हुए उन्हें समय समय पर पुरूस्कारों से नवाजा जाता रहा है। यहां तक कि सीबीएसी बोर्ड ने भी उन्हें जिम्मेवारियां सौंपी हैं।

छात्रों में निखार लाने और उनके सामुहिक विकास के लिये वे पढाई-लिखाई के अलावा उनके सेहत और खेल पर भी ध्यान देते रहे हैं। जब कांग्रेस नेता अर्जन सिंह केंद्र में एचआरडी मंत्री थे, उस दौरान उन्होंने श्री श्रीवास्तव को टिचर मेरिट अवार्ड और महात्मा हंसराज अवार्ड से सम्मानित किया। और हाल हीं में कोल इंडिया के अध्यक्ष पार्थों भट्टाचार्या ने श्री श्रीवास्तव को कोल इंडिया का ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया है। ये सब कुछ श्री श्रीवास्तव के शिक्षा के प्रति उल्लेखनीय योगदान को दर्शाता है।

Thursday, May 22, 2008

विनोद बाबू के कुर्बानी को नहीं भुलाया जा सकता

प्रदीप सिंह
मैं तो आपको अपने विचार भेज रहा हूं लेकिन क्या आप मेरे विचार प्रकाशित करेंगे। विनोद बाबू झारखंड के मसीहा हैं। विश्व विद्यालय के नामकरण को लेकर उनके नाम का विरोध तो होना ही नही चाहिये। राज्य सरकार को खुद पहल कर उनके नाम पर एक विश्व विद्यालय ही नहीं बल्कि कई प्रोजेक्ट शुरू करनी चाहिए। जब अलग झारखंड राज्य को लेकर पूरा आंदोलन ठप पड़ चुका था तो वैसे में विनोद बाबू ने हीं तो झारखंड आंदोलन को क्रांतिकारी रूप रेखा दी। इतना हीं नहीं उन्होंने गांव गांव घुम कर शिक्षा का प्रचार किया। उसी का परिणाम है कि आज झारखंड राज्य के अधिकांश नेता पढे लिखे हैं।
देश के हर राज्य में लोग अपने अपने राज्य के राजनीतिज्ञ, विद्वान और समाजसेवक के नाम पर सड़क, स्कूल-कॉलेज और तमाम तरह की प्रोजेक्ट का नाम रखते हैं। तो झारखंड में ऐसा क्यों नहीं हो सकता है। मुझे डर है कि यह मामला कहीं राजनीति के पचड़े में न फंस जाये। यदि ऐसा होगा तो बड़ा ही बूरा होगा। वामपंथी विचार से प्रभावित विनोद बाबू झारखंड मुक्ति मोर्च के जन्मदाता और संस्थापक अध्यक्ष रहे। इनके निधन के बाद इनके ज्येष्ठ पुत्र राजकिशोर बाबू झामुमो के बैनर तले सांसद बने। हालांकि राजकिशोर बाबू सांसद बनने से पहले अलग राज्य के मुद्दे पर कई आंदोलन को नेतृत्व दिए। राजकिशोर बाबू को भी क्रांतिकारी माना जाता है। आंदोलन इसका गवाह है।

देश के प्रतिष्ठित एडवोकेट में से एक राजकिशोर बाबू आज भाजपा में है। झामुमो कब का छोड़ चुके हैं । झामुमो छोड़ने की वजह थी सिर्फ किसी भी कीमत पर अलग राज्य के लिए सरकार पर दबाव बनाना। खैर कहीं ऐसा न हो कि राजकिशोर बाबू के भाजपा में आ जाने से वर्तमान सरकार विनोद बाबू को भूल जाये। राज्य के लिए उनकी कुर्बानी को नहीं भुलाया जा सकेगा।

Monday, May 19, 2008

विनोद बिहारी महतो के नाम पर धनबाद में विश्व विद्यालय बनाने की मांग में तेजी

झारखंड के धनबाज जिले में एक नए विश्व विद्यालय का गठन और उसके नामकरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है। जिले में विश्व विद्यालय हो इसको लेकर कोई मतभेद नहीं लेकिन विश्व विद्यालय का नाम क्या हो इसको लेकर मतभेद दिखने लगे हैं। एक पक्ष का कहना है कि विश्व विद्यालय का नाम कोयलांचल विश्व विद्यालय होना चाहिये जबकि दूसरे पक्ष कहना हैं कि विश्व विद्यालय का नाम विनोद बिहारी महतो(VBN university) होना चाहिये। इस पर विजय चंद्रवंशी ने कई लोगों से बातचीत की एक रिपोर्ट -
प्रकाश महतो, समाज सेवक – विनोद बाबू सदैव ही गरीबों के लिए लड़ाईयां लड़ी, जेल गए, क्रांतिकारी आंदोलन किए। शिक्षा का प्रसार जितना उन्होने किया उतना किसी ने नहीं किया। इसके बावजूद विनोद बाबू के नाम पर विश्व विद्यालय का नाम रखने के लिए आवाज उठानी पड़ रही है। इसकी जरूरत पड़नी ही नहीं चाहिए थी। सरकार को खुद इसके लिए पहल करनी चाहिए।
पंकज पांडे(छात्र) – धनबाद मुख्यत: कोयला के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है इसलिए कोयलांचल विश्व विद्यालय नाम रखा जाना चाहिए। लेकिन यदि विश्व विद्यालय का नाम विनोद बाबू के नाम पर रखा जाता है तो उसे कोई एतराज नहीं हैं।
संतोष गुप्ता(छात्र) – जब धनबाद और गिरिडीह जिले के गांवों में शिक्षा का कोई साधन नहीं था। बिहार सरकार कोई ध्यान नहीं देती थी तब विनोद बाबू ने अपने पैसे से उन जगहों पर स्कूल खोले और लोगों को शिक्षित करने का अभियान चलाया जहां सरकार सोचती भी नहीं थी। इसलिए विश्व विद्यालय का नाम विनोद बिहारी महतो विश्व विद्यालय ही होनी चाहिये।
अजय सिंह, (एल एल बी छात्र) – मेरा मानना है कि विश्व विद्यालय का नाम कोयलांचल हो या विनोद बिहारी महतो इससे अधिक फर्क नहीं पड़ता। लेकिन पढाई अच्छी होनी चाहिये।

गणेश रवानी – मैं सी.ए. कर चुका हूं। मेरा स्कूल कॉलेज से कोई वास्ता नहीं लेकिन मेरा मानना है कि विनोद बाबू के नाम पर नये विश्व विद्यालय का नाम रखा जाना चाहिए। उन्हें झारखंड का भीष्मपीतामाह कहा जाता है उनके नाम का तो विरोध होना हीं नहीं चाहिये था। वे झारखंड के लिए जोरदार लड़ाई नहीं लड़ते तो आज झारखंड राज्य का गठन नहीं होता।
विशाल यादव- देखिये अंदरी बाहरी का कोई मुद्दा नहीं है। जो लोग विनोद बाबू के नाम का विरोध कर रहे हैं और अंदरी बाहरी का मुद्दा उठा रहे हैं वे लोग जातीयता से ग्रस्त हैं। विनोद बाबू ने जितना काम किया हैं उतना किसी ने नहीं किया। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि विनोद बाबू का नाम का जो लोग विरोध कर रहे हैं वे सिर्फ इस लिये विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे पिछड़ वर्ग के है। यदि वे पिछड़ वर्ग के नहीं होते तो कोयलाचंल में कभी उनके नाम पर असहमति की बात कोई नहीं करता।

आपने जितने लोगों के प्रतिक्रिया पढे उनमें से अधिकांश लोग विनोद बिहारी महतो के नाम पर विश्व विद्यालय की स्थापना की सीधे तौर पर वकालत कर रहे हैं। अब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर राज्य सरकार धनबाद में विनोद बाबू के नाम पर विश्व विद्यालय की स्थापना की पहल क्यों नहीं कर रही है। विनोद बाबू के व्यक्तित्व को राजनीतिक दलगत की भावना से परे रख कर देखना चाहिए।
आप भी यदि अपना पक्ष रखना चाहते हैं तो मुझे ई-मेल कर सकते हैं।