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Friday, October 16, 2009

नक्सली हमले में मारे गये इंस्पेक्टर फ्रांसिस के परिवार से मिले राहुल गांधी

नक्सलियों के हमले में मारे गये इंस्पेक्टर फ्रांसिस इंदवार की पत्नी सुनीता ने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को बताया कि नक्सवाद पर रोक लगाने के लिये ग्रामीण इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था करनी होगी - जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क आदि। सुनिता और उनके तीनों बच्चों से मिलने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी खुद गये थे। क्योंकि कुछ दिनों पहले नक्सलियों ने इंस्पेक्टर फ्रांसिस की बेरहमी से हत्या कर दी थी। राहुल गांधी ने खुद पूछा कि नक्सवाद को मुख्यधारा में लाया जा सकता है।

इंस्पेक्टर के परिवार वालों से राहुल गांधी ने कहा कि आत्मघाती हमले में पिता को खोने का दर्द वे समझते हैं। उन्होंने इंदवार की पत्नी सुनीता और तीनों बच्चो को हिम्मत देते हुए कहा कि तमिलनाडु के श्रीपेरूम्बुदूर में उन्होंने भी अपने पिता को खो दिया था।
1991 में आत्मघाती हमले में उनके पिता की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने बच्चो से कहा कि आप अच्छे से पढाई करना।

अपने दो दिवसीय झारखंड दौरे के दौरान राहुल गांधी ने इंदवार के परिवार के यहां लगभग 20 मिनट बताय़े। राहुल गांधी ने इस बात पर भी विचार करना शुरू कर दिया है कि नक्सलियों को मुख्यधारा में कैसे लाया जाये। उनकी बुनियादी समस्याओं को समझ उसे कैसे दूर किया जाये।

Wednesday, December 31, 2008

धोनी को दाऊद के नाम पर धमकी, सुरक्षा व्यवस्थी और कड़ी की गई

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को धमकी दी गई है कि वह 50 लाख का इंतजाम कर ले नहीं तो अच्छा नहीं होगा। तुम्हारे परिवार को मार दिया जायेगा। यह धमकी रांची स्थित उनके घर पत्र भेजकर दी गई है। उन्हें कुल दो पत्र मिले हैं। पहले पत्र में धमकी था तो दसूरे में धमकी के साथ हिदायत थी कि पहले पत्र की धमकी को यू न हीं लें।

धमकी देने वालों ने अपने आपको अंडरवर्लड डॉन दाऊद का आदमी बताया है। इस मामले की झारखंड पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है। महेंद्र सिंह धोनी की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है। राज्य के उप मुख्यमंत्री ने सुधीर महतो ने कहा है कि धोनी की सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कमी नहीं की जायेगी। धोनी की सुरक्षा में महिला पुलिस को भी लगाया गया है ताकि लडकियां उन्हें बेवजह परेशान न कर सके।


धोनी के परिवार को पहला पत्र 29 दिसंबर को मिला और दूसरा 31 दिसंबर यानी आज मिला। रांची की एस एस पी संपत मीणा ने कहा इस पत्र के पीछे किसी लोकल गुंडा का षडयंत्र मालूम पड़ता है। लेकिन इस मामले को पुलिस ने गंभीरता से लिया है और जल्द हीं किसी नतीजे तक पहुंच जायेंगे। साथ हीं महेंद्र सिंह की धोनी की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दिया गया है

Friday, January 25, 2008

सिंगापुर से हत्या करने आया था ब्रजेश सिंह

कॉन्ट्रेक्ट किलर ब्रजेश सिंह सिंगापुर से भुवनेश्वर पहुंचा था हत्या करने के लिये लेकिन उससे पहले ही वह पुलिस के हत्थे चढ ही गया। करोड़ों का सुपारी लेने वाला ब्रजेश किसकी हत्या के लिये भुवनेश्वर पहुंचा था इसकी जांच पड़ताल पुलिस कर रही है। यह हत्या कोयले और लोहे के धंधे से जुड़े किसी बाहुबली का ही होना था क्योंकि ब्रजेश अबतक कोयलांचल में दर्जनों बाहुबलियों की हत्या कर चुका है जिनमें धनबाद के शकलदेव सिंह, विनोद सिंह और संजय सिंह का नाम शामिल है।
उसे 24 जनवरी को उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया गया। बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश, झारखंड, दिल्ली और मुंबई पुलिस से बचने के लिये उसने सिंगापुर को अपना ठिकाना बनाया और दो महीने पहले हीं वह सिंगापुर से भुवनेश्वर पहुंचा। जब ब्रजेश भुवनेश्वर के बड़ा बाजार में चहल कदमी कर रहा था तभी दिल्ली पुलिस और उड़ीसा के पुलिस ने ब्रजेश को अपने कब्जे में ले लिया। उस समय पुलिस को काफी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा क्योंकि पुलिस वाले सिविल कपड़े में थे इसलिये लोगों को लगा कि ब्रजेश का कुछ लोग अपहरण कर रहा है। बाद में सच्चाई जानने के बाद लोग शांत हो गये। हुलिया बदलने में माहिर ब्रजेश के भुवनेश्वर में रहने से यही कयास लगाया जा रहा है कि इस बार किसकी हत्या होने वाली थी।

उसके गिरफ्तारी से अपराध जगत और राजनीति की दुनिया में खलबली मची हुई है। कहा जाता है कि भाजपा के टिकट पर अपने भाई चुलबुल सिंह को विधान परिषद सदस्य बनवाने में भी ब्रजेश का ही हाथ था। उत्तर प्रदेश के वाराणसी का रहने वाला ब्रजेश सिंह के खिलाफ दर्जनों मामले दर्ज हैं जिनमें हत्या, अपहरण जैसे भी मामले हैं। ब्रजेश 1985 में अपने पिता के हत्यारे की हत्या करने के बाद जुर्म की दुनिया में पहला कदम रखा फिर मुड़ कर कभी नहीं देखा। 22 सालों बाद पुलिस के कब्जे में आया ब्रजेश सिंह कभी भी माफिया सरगना नहीं बन सका लेकिन वह अपराध जगत में एक खूंखार कॉन्ट्रेक्ट किलर के रुप में जाना जाता रहा। अपराध जगत में हमेशा चर्चित रहने वाला ब्रजेश कभी भी किसी का विश्वसनीय नहीं रहा और न हीं कभी भी किसी पर विश्वास किया चाहे उसे कोई लाखों रुपये का फाइनेंस ही क्यों न करता रहा हो।

उत्तर प्रदेश में वह कभी वहां के बाहुबली हरि शंकर तिवारी से जुड़ा तो कभी मुख्तार अंसारी से तो कभी अतीक अहमद से। पिता के हत्यारे की हत्या करने के बाद भी लोग उसे अपराधी नहीं मानते थे लेकिन ब्रजेश अपराध जगत की ओर बढ चुका था। उसका नाम 1992 में जोरदार तरीके से अपराध जगत में सामने आया। जब उसने अंडर वर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के खास आदमी सुभाष ठाकुर के साथ मिलकर मुंबई के जे जे हॉस्पीटल में गोलीबारी की जिसमें शैलेष हलदनकर, सिपाही के पी भनावत और सी जे जेवसन की मौत हो गई। दरअसल शैलेष और विपिन सेरे ने दाउद इब्राहिम के बहनोई इब्राहिम पारकर की हत्या कर दी थी ये लोग गिरफ्तार होने के बाद हॉस्पीटल में भर्ती था जहां दाउद के इशारे के बाद बदला लिया गया। इस हत्याकांड के बाद ब्रजेश का नाम दाउद इब्राहिम के साथ जुड़ गया।

ब्रजेश अपनी आमदनी के लिये कोयले और लोहे के धंधे में पैर जमाने का फैसला किया लेकिन इसके लिये उसे उत्तर प्रदेश का कोयला मंडी और धनबाद के कोयला पर पकड़ होनी जरुरी थी लेकिन ब्रजेश के लिये यह काम आसान नहीं था क्योंकि धनबाद जिले में एक से बढकर एक कोयला माफिया है जिनसे मुकाबला करना ब्रजेश के बूते की बात नहीं थी इस लिय़े ब्रजेश ने सुपाड़ी लेकर हत्या करने का फैसला किया। इस खेल में उसने उत्तर प्रदेश के बाहुबलियों पर भी गोली बारी की लेकिन उसने फिल्मी अंदाज में धनबाद जिले में कोयला के खेल में शकल देव सिंह, विनोद सिंह और संजय सिंह को मौत की नींद सुला दी । बताया जाता है कि इन हत्याओं का कॉन्ट्रेक्ट करोड़ो का था। आरजेडी नेता राजू यादव की हत्या में भी ब्रजेश का हीं नाम सामने आया था।

बहरहाल गिफ्तारी के बाद बाहुबलियों में हड़कम मचा हुआ है। उससे जुड़े हर नेता को डर सता रहा कि पता नहीं कहीं बर्जेश सिंह ने उसका नाम ले लिया तो क्या होगा?

Sunday, September 30, 2007

झारखंड के उप मुख्यमंत्री पर हमले कि कोशिश

धनबाद से कुंदन सिंह
झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता और झारखंड के उप मुख्यमंत्री सुधीर महतो के काफिले पर हमले की नाकाम कोशिश की गई।श्री महतो विनोबा भावे विश्वविधालय में आयोजित एक युवा महोत्सव में भाग लेकर धनबाद से जमशेदपुर लौट रहे थे। रास्ते में पश्चिम बंगाल में पुरुलिया और बलरामपुर के बीच जैसे ही सुधीर महतो की गाड़ी पहुंची उनकी गाड़ी पंक्चर हो गई। ये पंक्चर एक प्लान के तहत बिछाई गई कील से हुई। यह मामला रात के साढे ग्यारह बजे के आसपास की है। खतरे को भांपते हुये सुरक्षा बलों ने अपराधियों से मुकबला करने के लिये पोजिशन ले ली। तब जाकर वे लोग भाग खड़े हुये जो लोग किसी घटना को अंजाम देने की मकसद से रास्ते में कीलें बिछाई थीं। अनुमान के आधार पर कहा जा रहा है कि सड़क लुटेरा गिरोह के सदस्यों ने लूट की घटना को अंजाम देने की कोशिश के तहत सड़क पर कीलें बिछाई होंगी। चर्चा यह भी है कि यह योजना सुधीर महतो की हत्या की साजिश के तहत किया गया था लेकिन इस बात के अभी तक कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलें है। उल्लेखनीय है कि इसी साल 4 मार्च को झामुमो नेता और सासद सुनिल महतो की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी । इस लिये इस घटना की जांच पुलिस हर तरह से कर रही है। बहरहाल रात में हीं श्री महतो को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जमशेदपुर पहुंचा दिया गया।

Sunday, September 16, 2007

वकील की हत्या जमशेदपुर में

झारखंड के जमशेदपुर में अरविंद गुहा ने अपने ही वकील सुधान चटर्जी की हत्या कर दी। यह हत्या उसने पुलिस की मौजूदगी में की और इसमें अरविंद गुहा की पत्नी ने भी अपने पति का साथ दिया। हत्या का आरोपी अरविंद गुहा का कहना है कि संपति विवाद को लेकर उसका और उसके भाई के बीच विवाद चल रहा था और यह मामला न्यायलय में है। लेकिन मेरा वकील सुधान चटर्जी ने मुझसे गदारी कर मेरे भाई से साठगांठ कर लिया और मुझे न्यायलय में हरवा दिया।
इस घटना के बारे में कहा जा रहा है कि वकील सुधान को अरविंद पिछले एक माह से ज्यादा समय तक बंधक बना कर रखा तो इतने दिनों तक पुलिस क्या कर रही थी? ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि यदि वकील ने अपने क्लाइंट के साथ धोखा किया तो क्या यह उचित है? बहरहाल हत्या को किसी भी तरह सही नहीं कहा जा सकता। यदि सुधन को कोई शिकायत थी अपने वकील से, तो उसके खिलाफ न्यायलय में शिकायत की जा सकती थी। न्यायलय में इसके लिये भी व्यवस्था है।सही पाये जाने पर सुधान के खिलाफ न्यायलय ज़रुर कार्रवाई करती। लोगों के साथ न्याय हो इसके लिये ज़रुरी है कि वकील, पुलिस और प्रशासन सभी को न्याय संगत काम करना होगा अन्यथा इस तरह के अपराध को रोक पाना काफी मुश्किल होगा।

Thursday, August 23, 2007

हत्याकांड में शिबू सोरोन बरी

झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता शिबू सोरेन को शशिनाथ झा हत्याकांड मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है. उन्हें निचली अदालत ने उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी.दिशोम गुरु के नाम से मशहूर शिबू सोरोन के साथ उम्र कैद की सजा पाए शैलेद्र भट्टाचार्या, अजय कुमार मेहता, किशोर मेहता और पशुपति नाथ मेहता को भी बरी कर दिया गया। हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो ( सीबीआई) ने अभियुक्तों के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर पाये।इतना हीं नहीं, हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के सभी तर्क को सिरे से खारिज कर दिया।
ट्रायल कोर्ट ने शिबू सोरोन को पिछले साल 28 नवम्बर(वर्ष 2000) को दोषी ठहराया और 5 दिसंबर को उम्र कैद की सजा दी थी । हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुआ कहा कि जब नरसिंह राव सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसदों को रिश्वत देने का प्रमाण नहीं है तो शशिनाथ झा द्वारा शिबू सोरेन से घूस की रकम में अपना हिस्सा मांगने का सवाल हीं नहीं उठता। इतना हीं नहीं हाई कोर्ट ने सीबीआई के इस तर्क को भी मानने से इंकार कर दिया कि बरामद कंकाल सोरेन के निजी सचिव शशिनाथ झा की है। डीएनए टेस्ट में भी इसकी पुष्टि नहीं हुई थी।

बहरहाल शिबू सोरेन की रिहाई की ख़बर से सोरेन समर्थकों मे भारी उत्साह है। सोरेन के पुत्र दुर्गा सोरेन, हेमंत सोरेन और वंसत सोरेन ने इस पर खुशी जताई। उनकी पत्नी ऱुपी सोरेन ने कहा कि उन्हें न्यायलय पर पूरा भरोस था कि और न्याय की पूरी उम्मीद थी।हेंमत सोरेन ने कहा कि मेरे पिताजी का इस हत्याकांड से कोई लेना देना नहीं है लेकिन उन्हें काफी कष्ट झेलना पड़ा। मेरे परिवार को बदनाम किया गया लेकिन अंत में न्याय की जीत हुई। हम सभी परिवार को शुरु से ही न्यायलय पर भरोसा था कि पिताजी के साथ न्याय ज़रुर होगा।इस बीच झारखंड के मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कहा कि शिबू सोरेन को देर से ही सही न्याय मिला है.उन्होंने कहा कि यदि वह मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं तो वे उनके लिये कुर्सी छोड़ने को तैयार हैं।
उधर शशिनाथ झा के परिवार वाले हाई कोर्ट के फैसले से खुश नहीं है। उनकी मां प्रियवंदा ने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है। परिवार वालो का कहना है कि हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ वे उच्चतम न्यायलय जायेंगे।