Wednesday, August 15, 2012

स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर के नेतृत्व में नये भारत का उदय।

स्टार प्लस पर दिखाये जाने वाले कार्यक्रम सत्यमेव जयतेने भारत में एक साइलेंट क्रांति का आगाज कर दिया है। इस कार्यक्रम ने देश के हर नागरिक को अपने कर्तव्य के प्रति जागरुक होने का अहसास दिलाया। इसका इतना अधिक प्रभाव पड़ा कि देश के इतिहास में पहली बार, किसी धारावाहिक पर, प्रधानमंत्री से लेकर एक आम आदमी तक चर्चा करते दिखे। इसके लिये स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर और फिल्म स्टार आमिर खान धन्यवाद के हकदार हैं।

आमिर खान पर्दे के एक बड़े नाम हैं। उन्हें हर लोग जानता है। इनसे हम आप सब वाकिब हैं। लेकिन हम आपको ऐसे हस्ती के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर इस कार्यक्रम की सफलता की स्क्रिप्ट लिखी और योजना बनाई। उन्होंने लोगों को देश और समाज की एकता और संपन्नता पर विचार करने के लिये मजबूर कर दिया। वे हैं स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर।

सत्यमेव जयते को कैसे सफल बनाया उदय शंकर ने - टेलीविजन की दुनिया दो हिस्सों में बंटी हुई है पहला समाचार और दूसरा मनोरंजन। और दोनो हीं दुनिया में आज उदय शंकर से बड़ा कोई नाम नहीं है। उदय शंकर आज स्टार इंडिया के सीईओ हैं। इससे पहले वे सफल पत्रकार रह चुके हैं। उनकी पत्रकारिता की सफलता पर चर्चा से पहले हम यह जानेंगे कि उन्होंने सत्यमेव जयते को इतना अधिक लोकप्रिये कैसे बना दिया। फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन के एंकरिंग में कौन बनेगा करोड़पतिजैसा लोकप्रिय कार्यक्रम भी सत्यमेव जयते की लोकप्रियता के सामने काफी छोटा दिखने लगा। एक नजर स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर के दूरदृष्टि पर -

1. वे हमेशा देश और समाज को सही दिशा में ले जाने के लिये प्रयत्नशील रहे।
2. उन्होंने सत्यमेव जयते के विषय को चयन करने में, काफी मेहनत की और सकारात्मक दृष्टि अपनाया।
3. देश और समाज से जुड़े मुद्दों पर आधारित सत्यमेव जयते को, स्टार इंडिया के स्टार प्लस समेत आधा दर्जन से उपर चैनल्स में दिखाने की रही झंडी दी।
4. इतना हीं नहीं अपने लोकप्रिय धारावाहिक सत्यमेव जयते को आमदनी का जरिया नहीं बनाया। उन्होंने विषय के महत्व को अधिक महत्व दिया।
5. देश और समाज को जोड़ने वाले इस कार्यक्रम को उन्होंने दूरदर्शन पर भी दिखाने की हरी झंडी दी। दूर्रदर्शन पर जो सत्यमेव जयते दिखाये गये उसका कॉमर्शियल लाभ भी स्टार इंडिया ने नहीं लिया बल्कि वह लाभ दूरदर्शन के खाते में गया।
6. बताया जाता है कि दूरदर्शन पर बिना कॉमर्शियल लाभ के दिखाने के पीछे उदय शंकर की सोच बेहद सकारात्म थी। वे चाहते थे कि देश और समाज को जोड़ने वाले इस कार्यक्रम को पूरा देश देखे। इसलिये उन्होंने कॉमर्शियल की परवाह नहीं की। उनका यह फैसला अदम्य साहस भरा था। शायद हीं किसी कंपनी का सीईओ ऐसा फैसला कर सके।
7. सफल पत्रकार रहे उदय शंकर ने मनोरंजन टीवी दुनिया की परिभाषा हीं बदल दी। उन्होंने यह कर दिखाया कि मनोरंजन की दुनिया में भी रहकर देश और समाज को आगे बढाने के लिये बहुत कुछ किया जा सकता है बर्शते सही सोच और नजरिया हो। सत्यमेव जयते इसका सबसे ताजा और बड़ा उदाहरण है।

स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर ने बतौर रिपोर्टर अपनी कैरियर की शुरूआत की थी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। वे न्यूज चैनल आजतक और स्टार न्यूज को हेड कर चुके हैं। इसके एडिटर-इन-चीफ रह चुके हैं। बहरहाल उनके नेतृत्व में सत्यमेव जयतेने देश और समाज को उस सच्चाई से रूबरू कराया जिसे काला सच मानकर देश की आधी आबादी ने अपने सीने में दबा रखा था लेकिन सत्यमेव जयते के प्रसारण के बाद लोग देश और समाज में फैली बुराईयों को दूर करने और एक स्वस्थ्य भारत बनाने के लिये खुलकर सामने आने लगे हैं।

बहरहाल, स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर ने एक स्वस्थ्य भारत बनाने की ओर ठोस कदम के साथ आगाज कर दिया है। आप कह सकते हैं कि बंदे में है दम, बंदे मातरम्।

Thursday, March 8, 2012

झारखंड लॉ कमिशन के अध्यक्ष बने राजकिशोर महतो

भारतीय जनता पार्टी प्रदेश उपाध्यक्ष राजकिशोर महतोको झारखंड लॉ कमिशन यानी विधि आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। श्री महतो के अध्यक्षबनने के बाद अब कई ऐसे मसले हैं जिसपर राज्य की कानूनी नजरीया एकदम साफ होगी।

अभी राज्य में ताजा-ताजा सीएनटी एक्ट का मामला है। इसमामले को लेकर झारखंड की राजनीति चरम पर है। श्री महतो पर पहला दबाब यही होगा किइस मामले में कानूनी पक्ष क्या होगा उसको साफ करे। दूसरा दबाव यह होगा कि मेयर का चुनाव सीधे चुनाव के मार्फत हो या जीते हुए पार्षद अपने में से हीं किसी को मेयर चुने। अभी झारखंड में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव सीधे तौर पर होता है। लेकिन लोगों की मांग है कि पार्षद हीं अपने में किसी को मेयर और डिप्टी मेयर का चुनावकरें। इसके अलावा दर्जनों मामले हैं जिसका भार राजकिशोर महतो के कंधे पर होगा।

झारखंड लॉ कमिशन के अध्यक्ष बनने पर गिरिडीह के रहने वाले लोजपा के राष्ट्रीय महासचिव राजकुमार राज ने श्री महतो को बधाई दिया है। उन्होंने कहा कि श्री महतो झारखंड के एक बड़े नाम है। सुप्रीम कोर्ट के वकील है। कानून के जानकार हैं। उनमें विवादित कानूनी विषयों को भी बारीकी से समझने की गजब की क्षमता है। श्री राजकुमार राज ने कहा कि मुख्यमंत्री अर्जुन मुंड़ा जी को भी बधाई क्योंकि इस महत्वपूर्ण पद पर उन्होंने एकदम उपयुक्त व्यक्ति का चयन किया है।

धनबाद के विलाल महतो और उदय चंद्रवंशी ने कहा कि अब समाज के कमजोर वर्ग से जुडे लोगों की हितो की रक्षा हो पायेगी। उनके हित में कानून बन पायेंगे। बहरहाल, राजकिशोर महतो, स्वर्गीय विनोद बिहारी महतो के ज्येष्ठ पुत्र हैं। इनके पिता विनोद बाबू झारखंड मुक्ति मोर्चा(झामुमो) के संस्थापक अध्यक्ष रहे। राजकिशोर महतो भी अपनी राजनीति की शुरूवात झामुमो से की। लेकिन वर्तमान में वे भाजपा में हैं और धनबाद जिले के सिंद्री विधान सभा से विधायक रह चुके हैं।
इनका जन्म 23 सितंबर 1946 को हुआ। शुरू से मेधावी छात्र रहे श्री महतो ने धनबाद जिले स्थित विश्व प्रसिद्ध माइनिंग इंजीनियरिंग कालेज से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके बाद कानून की पढाई कर कानून की डिग्री हासिल की। पटना उच्च न्यायलय के रांची पीठ में 1990-91 के दौरान दो वर्षों तक सरकारी वकील भी रहे।
18 दिंसबर 1991 को अपने पिताजी के निधन के बाद उनके स्थान पर गिरिडीह संसदीय सीट से उपचुनाव जीतकर लोक सभा पहुंचे। इनके पिताजी गिरिडीह से सांसद थे। बिनोद बाबू को झारखंड का भीष्मपिता माह भी कहा जाता है। वे सांसद से भी बढकर एक क्रांतिकारी थे। उन्होंने झारखंड में दब-कुचलों में चेतना जगायी – पढो और लड़ो के नारे साथ। बहरहाल बीजेपीनेता राजकिशोर महतो के कंधों पर एक बड़ी जिम्मेदारी है।

Sunday, January 1, 2012

भारत रत्न के हकदार है ड़ॉ होमी जहांगीर भाभा

राजेश कुमार।

नये साल की सभी को शुभ कामनायें। इस मौके पर आप सभी से आग्रह है कि अगला भारत रत्न डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा को मिले और इसके लिये इस बात को आगे बढायें।

डॉ होमी जहांगीर भाभा एक ऐसा नाम जो हर भारतीय के नाम को दुनिया में गौरवान्वित करता है। दुनिया के महान वैज्ञानिकों में इनका नाम शुमार है। जब परमाणु बम के दम पर दुनिया में नरंसहार हो रहा था और एक-दूसरे देशों को धमकियां दी जा रही थी।उस समय डॉ भाभा ने नाभिकीय उर्जा की बात की थी। यानी परमाणु से बिजली पैदा की जा
सकती है। यानी दुनिया को ध्वस्त करने की वजाय उन्हें बिजली संकट से ऊबारने की बात
की। विश्व निर्माण की बात की। उनके इस नाभिकीय बिजली की कल्पना को मानने के लिये कोई तैयार नहीं था। लेकिन डॉ भाभा ने इस दिशा में काम करने की योजना बनाई और साथ ही भारत को परमाणु शक्ति देश बनाने की ओर काम करना शुरू कर दिया।

डॉ भाभा का जन्म 30 अक्टूबर 1909 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने मुंबई के एलफिंस्टन
कालेज रायल इंस्टीट्यूट आफ साइंस से बीएससी पास किया और उच्च शिक्षा के लिए कैम्ब्रिज
विश्वविद्यालय में रहकर 1930 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 1934 में उन्होंने
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। जर्मनी में उनके कास्मिक किरणों पर
प्रयोग और इस पर उनके गहन अध्ययन की। दुनिया भर में चर्चा हुई। उन्होंने भारत वापस आने पर अपने इस अनुसंधान यानी रिसर्च को आगे बढाने का काम जारी रखा। और 1944 में बहुत कम वैज्ञानिकों की मदद से नाभिकीय
ऊर्जा पर रिसर्च का शुरू किया।
विज्ञान के इस क्षेत्र उन्होंने तब काम करना शुरू किया जब दुनिया में इस बारे में बहुत कम को जानकारी थी। अविछिन्न श्रृखंला अभिक्रिया की जानकारी नहीं के बराबर थी। उन्होंने परमाणु ऊर्जा से बिजली पैदा करने
की बात की तो उन दिनों दुनिया को विश्वास नहीं हुआ। भारत को परमाणु के क्षेत्र में शक्तिशाली बनाने के लिये सबसे पहले उन्होंने 1945 में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) की स्थापना की।
आजादी के बाद 1948 में भारत सरकार ने उन्हें परमाणु ऊर्जा आयोग का प्रथम अध्यक्ष
नियुक्त किया। उनकी ख्याति दुनिया भर में हो रही थी। उस दौर में खासकर परमाणु के
क्षेत्र में इतने कुशल वैज्ञानिक बहुत ही कम थे। उनकी क्षमता का अंदाजा इसी से
लगाया जा सकता है कि 1953 में जेनेवा में आयोजित विश्व परमाणुविक वैज्ञानिकों के
महासम्मेलन में उन्होंन सभापतित्व भी किया था।

बहरहाल, 24 जनवरी 1966 का दिन भारत के इतिहास में एक दुखद दिन के रूप में सामने आया। फ्रांस के मोंट ब्लांक में एक विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। इसी दुर्घटना के साथ भारत सालो साल परमाणु कार्यक्रम
के मामले में दुनिया से पिछड़ गया लेकिन उनके द्वारा परमाणु कार्यक्रम की जो बुनियाद रखी गयी, उसी आधार पर देश के अन्य वैज्ञानिक तेजी से भारत को परमाणु संपन्न बनाने में जुटे हैं।
आज भारत परमाणु संपन्न देश है। डॉ भाभा की मौत को लेकर कहा जाता है कि वे विदेशी ताकतों के साजिश के शिकार हो गये । विदेशी ताकतों को लगता था कि डॉ भाभा के रहते भारत बहुत जल्द ही परमाणु ताकत बन जायेगा।
डॉ भाभा के योगदान को भूलाया नहीं जा सकता है। डॉ भाभा के योगदान के कारण ही भारत आज परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी आगे तेजी से बढ रहा है।

Sunday, May 8, 2011

सहारा ग्रूप के न्यूज डायरेक्टर उपेंद्र राय को बदनाम करने की कोशिश

प्रवर्तन निदेशालय के एक अधिकारी राजकेश्वर सिंह ने सहारा ग्रूप के न्यूज डायरेक्टर उपेंद्र राय पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उन्हें रिश्वत देने और धमकी देने की कोशिश की। दूसरी ओर उपेंद्र राय ने कहा कि उन्हें बदनाम करने की साजिश है। अब यह मामला अदालत में है। अब माननीय अदालत को फैसला करने दीजिये। लेकिन कुछ लोग सहारा ग्रूप के न्यूज डायरेक्टर राय के खिलाफ प्रचार अभियान में ऐसे जुट गये हैं जैसे किसी से सुपाड़ी खाई हो।

उपेंद्र राय को जानने वालों का कहना है कि उपेंद्र राय जिस भी समाचार को कवर किये वे उसमें रम जाते थे। तह तक काम करते थे। इस दौरान उनके रिपोर्टिंग से जिसके काले कारनामे सामने आ गये या जिसका लेन-देन का हिसाब किताब गडबड़ा गया वह उपेंद्र के खिलाफ हो गये। वह उपेंद्र को बदनाम करने की हर संभव कोशिश करने लगे।

बहरहाल जो भी हो अब मामला माननीय अदालत में है। लेकिन जो लोग उपेंद्र को बदनाम करने में लगे हैं उन्हें उपेंद्र के पत्रकारिता करियर पर भी एक नजर डाल देनी चाहिये। तब शायद उनका भ्रम दूर हो जायेगा।

उपेंद्र राय सहारा न्जूय में बतौर डायरेक्टर ज्वाइन करने से पहले स्टार न्यूज में सिनियर एडिटर थे।

ब्रेकिंग न्जूय - उपेंद्र ने हार्ड न्यूज से लेकर मनोरंजन की दुनिया तक में ऐसे न्यूज ब्रेक किये जिसके बारे में आम लोग जानना चाहते हैं। उन्होंने दर्जनों न्यूज ब्रेक किये हैं लेकिन जो याद है उनका उल्लेख आगे कर रहा हूं। 20 अक्टूबर 2005 को उन्होंने डीमेट एकाउंट घोटाला का पर्दाफाश किया था। इस घोटाले में देश की बड़ी बड़ी फाईनेंश कंपनियां और ट्रैड से जुड़े दिग्गज लोग शामिल थे। इनलोगों ने गरीब लोगों ने नाम पर फर्जी डीमेट एकाउंट खोल रखे थे और करोड़ो करोड़ रुपये के घोटाले को अंजाम दिया। उपेंद्र की रिपोर्ट के बाद दिल्ली से लेकर मुंबई तक की सारी सरकारी मशिनरी हरकत में आई।26 अक्टूबर 2005-2006 के दौरान उपेंद्र ने फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन सहित अन्य कलाकारों के कमाई का लेखा जोखा पेश किया। और टैक्स से जुड़े सारे मामले सामने लाये। यह खबर भी उन दिनों काफी चर्चित रही। जैसे जैसे समय निकलता गया उपेंद्र एक से एक खोजी खबर जनता के सामने लाते गये।5 जनवरी 2007 को उन्होंने घोड़े के कारोबार से जुडे हसन अली को लेकर जबरदस्त खबर ब्रेक की ।

देश-दुनिया से जुड़े 36 हजार करोड के घोटाले का पर्दाफाश जब उपेंद्र ने किया तो सारी दुनिया चकित रह गई। पूरा सरकारी महकमा सकते में आ गया। इतना बड़ा घोटाला देश के सामने पहले कभी नहीं आया था। इसके अलावा दर्जनों हार्ड न्यूज ऐसे हैं जिसका ब्रेक उपेंद्र ने किया। यह न्यूज आज भी छाया हुआ है। और खास बात यह रही कि जिस न्यूज को ब्रेक उपेंद्र ने किया। वह खबर दूसरे रिपोर्टर को अगले दिन भी ठिक से नहीं मिल पाती थी।

मनोरंजन से जुड़े क्षेत्र में भी उपेद्र का जबरदस्त दखल रहा है। फिल्मी दुनियां की हस्ती ऐश्वर्या और अभिषेक बच्चन की शादी को लेकर मीडिया जगत में कयास लगाये जाते रहे। शादी की तिथियों को लेकर अटकलें लगती रही लेकिन पुख्ता तौर पर इस खबर को उपेंद्र ने हीं स्टार न्यूज में ब्रेक किया।


अवार्ड से सम्मानित -उनके जाबांजी रिपोर्टिंग के कारण हीं कई बार उपेंद्र को महत्वपूर्ण पुरूस्कारों से नवाजा गया। 19 जुलाई 2007 को देश का सबसे बढिया टीवी पत्रकार के लिये उन्हें न्यूज टेलीविजन अवार्ड से नवाजा गया। उन्हें इस वर्ष भी शानदार रिपोर्टिंग और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिये लायन गोल्ड अवार्ड से नावाजा गया। इन सबसे पहले उपेद्र को 2006 में स्टार न्यूज एचिवर अवार्ड से नवाजा गया।ब्रेकिंग न्यूज और शानदार रिपोर्टिंग के लिये लगातार किसी न किसी अवार्ड से सम्मानित किया जाना हीं उनकी शानदार सफलता को दर्शाता है।

उपेंद्र ने पत्रकारिता में अपनी कैरियर की शुरूआत राष्ट्रीय सहारा अखबार से शुरू की। सहारा के बाद वे स्टार न्यूज ज्वाईन किये। फिर वे बिजनस चैनल आवाज में गये। यहां यह बता दूं कि उपेंद्र की बिजनस न्यूज के मामले में भी जबरदस्त पकड़ है। उसके बाद फिर स्टार न्यूज आये और अब वे सहारा समय चैनल के न्यूज डायरेक्टर हैं।

बहरहाल यह भी खबर है कि उपेंद्र को हटाने के लिये बड़े बड़े दिग्गज लगे हुए हैं क्योंकि उपेंद्र बहुत कम ही उम्र में सहारा का न्यूज डायरेक्टर बन गये। ऐसे में कई लोग जो सहारा में डायरेक्टर बनने का सपना पाले हुए थे वे अपने सपने को चुर होते देख उपेंद्र के खिलाफ हो गये।

Wednesday, April 6, 2011

भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ एक मजबूत स्तंभ का नाम है सुमन गुप्ता

भ्रष्टाचार के खिलाफ जब पूरे देश में सुगबूगाहट शुरू हो चुकी है तब ऐसे में झारखंड में भी चर्चा होना लाजमी है। झारखंड कैडर की आईपीएस अधिकारी सुमन गुप्ता इन दिनों हर जुबान पर हैं। मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के नेतृत्व वाली सरकार ने सुमन गुप्ता को पुलिस के वायरलेस विभाग में भेज दिया है। इसको लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा पर अंगुली उठने लगी है। सवाल किये जाने लगें है कि आखिर क्यों एक ईमानदार आईपीएस अफसर को मुख्यधारा से हटाकर वायरलेस विभाग में भेज दिया गया ? क्या ईमानदारी से काम करने का यही ईनाम होता है।


सुमन गुप्ता इससे पहले धनबाद जिले की एसपी थी। वहां उन्होंने आर्गेनाइज क्राईम को पूरी तरह रोक दिया था। अपराध में भारी कमी आ गई थी। लेकिन अर्जुन मुंडा ने विधान सभा का उपचुनाव जितने के बाद हीं आईपीएस अधिकारी सुमन गुप्ता का ट्रांसफर कर दिया। वह भी वायरलेस विभाग में। रांची के महेश रवानी कहते हैं कि सुमन गुप्ता देश की आईरन लेडी हैं। अपराध करने वाले किसी व्यक्ति को नहीं छोडती चाहे वह पुलिस विभाग का ही कोई अधिकारी हो या कोई माफिया डॉन या कोई अन्य भ्रष्टाचारी।


रांची के हीं सुबोध उरांव कहते हैं कि सुमन गुप्ता देश की दूसरी किरण बेदी हैं। ईमानदारी की एक धार भारी पडेगा अपराधियों पर। जब सुमन गुप्ता धनबाद छोड कर जा रही थी तब पूरे शहर की आंखे नम थी। लोगों ने भरे दिल से उन्हें बिदा किया। ऐसा सम्मान पहले किसी भी आईपीएस अधिकारी को नहीं मिला।


बहरहाल जब देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चल रहे है ऐसे में आईरन लेडी सुमन गुप्ता से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन संपंर्क नहीं हो पाया। शायद वे यही सोच रही होंगी कि ईमानदारी से काम करने, गरीबो पर हो रहे अत्याचार को रोकन और विकास की बातें करने पर ईनाम नहीं, सजा मिलती है। उन्हें जानने वाले लोग बताते हैं कि आईपीएस सुमन गुप्ता अपने कर्तव्य से कभी पीछे नहीं हट सकती। आज देश ऐसे ही अधिकारियों के दम पर आगे बढ रहा है।

Thursday, September 30, 2010

अदालत का फैसला मंदिर-मस्जिद के पक्ष में

इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच ने विवादित अयोध्या मसले(बाबरी मस्जिद बनाम राम जन्मभूमि) पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांट दिया जाये। एक हिस्सा मंदिर के लिये होगा(जहां राम लल्ला की प्रतिमा है), दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाडा और तीसरा हिस्सा मस्जिद के लिये होगा।

न्यायाधीश एस यू खान, न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल और न्यायाधीश धर्मवीर शर्मा की तीन सदस्यीय बेंच ने इस मामले में आज (30 सिंतबर, 2010) दोपहर साढे तीन बजे फैसला सुनना शुरू किया था। यह फैसला बहुमत के आधार पर किया गया है सर्वसम्मति के आधार पर नहीं। एक अक्टूबर को रिटायर हो रहे है न्यायाधीश धर्मवीर शर्मा पूरी जमीन हिन्दुओं को देने के पक्ष में थे लेकिन न्यायाधीश अग्रवाल और न्यायाधीश खान जमीन को तीन हिस्सो को विभाजित करने के पक्ष में फैसला दिया।

तीनो जजों ने इस बात को स्वीकार किया कि विवादित जगह पर पहले मंदिर था। लेकिन न्यायाधीश खान ने यह भी कहा कि वहां पूजा नहीं की जाती थी। इस फैसले को 24 सितंबर को ही सुनाया जाना था लेकिन रमेश चंद्र त्रिपाठी की याचिका पर सु्प्रीम कोर्ट ने 23 सितंबर को निर्णय को एक हफ्ते के लिये टाल देने का आदेश दिया। फिर सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को याचिक पर सुनवाई करते हुए याचिक खारिज कर दी। इसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले सुनाने का रास्ता साफ हो गया। और हाई कोर्ट ने 30 सितंबर को साढे तीन बजे फैसला सुनाने का निर्णय लिया। तीन जजों में एक न्यायाधीश धर्मवीर शर्मा फैसला सुनाने के अगले दिन यानी एक अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं।

फैसले के महत्वपूर्ण बिन्दु –
- सुन्नी वक्फ बोर्ड की राम जन्म भूमि से संबंधित दावे को खारिज कर दिया गया।
- जमीन को तीन भागो में बांटी जायेगी।
- जहां राम लल्ला की प्रतिमा है वही राम जन्मभूमि है।
- जहां राम लल्ला की प्रतिमा है वह इलाका और उसके आसपास के इलाके मंदिर के लिये दी जायेगी।
- अदालत ने यह माना है कि विवादित स्थान पर प्रतिमा बाहर से रखी गई थी।
- मस्जिद के लिये एक तिहाई जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जायेगा।
- एक तिहाई जमीन निर्मोही अखाड़ा को भी दिया जायेगा। इनमें सीता रसोई और राम चबूतरा भी शामिल है।
- मंदिर बनने और पूजा करने पर कोई रोक नहीं।
- अदालत ने तीन महीने तक यथा स्थिति बनाये रखने के लिये कहा।

Tuesday, September 28, 2010

देश में कई समस्याएं हैं धार्मिक उन्माद से बचें।

सुप्रीम कोर्ट ने रमेश चंद्र त्रिपाठी की अर्जी खारिज कर दी। यानी इलाहाबाद हाईकोर्ट का लखनऊ बेंच अब अयोध्या मसले पर फैसला सुनाने के लिये आजाद है। 30 सितंबर को साढे तीन बजे लखनऊ बेंच अपना फैसला सुनायेगी। 1 अक्टूबर को लखनऊ बेंच के तीन जजों में से एक जज धर्मवीर शर्मा 1 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं।

अब माहौल गर्म होता जा रहा है। हिन्दू पक्ष और मुस्लिम पक्ष दोनों हीं इस मामले में कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यदि फैसला किसी एक के पक्ष में जाता है तो दूसरा पक्ष सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। इसलिये देश में धार्मिक उन्माद करने से दोनो ही पक्षों को बचना चाहिये।

ऐसे भी देश में बड़ी बड़ी समस्याएं मौजूद है। भारत को एक साथ दोहरी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अंदरूनी हालात मंहगाई से त्रस्त है। लोगों के पास रोजगार नहीं है। बेमौसम के कारण किसानों की हालात अच्छी नहीं है। फसलें बर्बाद हो रहे हैं। इतना हीं नहीं सीमा पर देश को एक साथ कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

पाकिस्तान जम्मू कश्मीर में तबाही मचा रहा है। चीन पाकिस्तान से मिलकर भारत को हर ओर से घेर रहा है। चीन नॉर्थ से लेकर नॉर्थ ईस्ट तक इलाके में नदियों में बांध बनाकर भारत को पानी से वंचित करने में लगा है। आने वाले दिनों में भारत को पानी के संकट का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में मंदिर-मस्जिद को लेकर धार्मिक उन्माद से बचना चाहिये।