Monday, August 13, 2012

पत्रकारिता जगत में उपेंद्र राय के नाम ऐतिहासिक रिकॉर्ड।

सहारा ग्रूप भारत के एक प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक है। मीडिया के क्षेत्र में सहारा ग्रूप की अपनी एक पहचान है। इस संस्थान को आगे बढाने की जिम्मेदारी सहारा ग्रुप के सीईओ व एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय के हाथों में है। उन्होंने महज 28 साल के उम्र में इस प्रतिष्ठित पद को संभाला।
उपेंद्र राय के मुख्य संपादक बनने के बाद मीडिया जगत में सहारा को एक नई पहचान मिली। न्यूज की गुणवता और उसकी क्वालिटी में जबरदस्त वृद्दि हुई।  सहारा दूसरे न्यूज चैनलों में भी मोनेटरिंग की जाती है।

मैं वर्तमान को बहुत संजिदगी से जीता हूं। भविष्य की योजनाएं बनाता हूं लेकिन उसको लेकर बहुत परेशान नहीं होता। ये कहना है सहारा ग्रूप के एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय का। इसलिये शुरूवात वर्तमान से हीं। इस समय सहारा ग्रूप का दारोमदार उपेंद्र राय पर है। वे एडिटर-इन-चीफ होने के साथ साथ सहारा के अन्य विभागों के भी सर्वोसर्वा भी हैं।

पत्रकारिता जगत में रिकॉर्ड

बतौर पत्रकार करियर की शुरूआत करने वाले पत्रकारों की बात की जाये तो उपेंद्र राय के नाम एक बड़ा रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। अभी तक किसी ने भी इतनी कम उम्र में एक बड़े संस्थान का ऐडिटर-इन-चीफ नहीं बना। उपेंद्र महज 28 साल के उम्र में सहारा समाचार ग्रूप के एडिटर-इन-चीफ बन गये।
बतौर पत्रकार कार्यरत

उपेंद्र राय ने पत्रकारिता की शुरूआत सहारा न्यूज पेपर से की। वहां काफी समय रहने के बाद वे साल 2003 में स्टार न्यूज ज्वॉइन किये। स्टार न्यूज के बाद वे ब़िजनस चैनल आवाज में गये। उसके बाद फिर वे स्टार न्यूज ज्वॉइन किये। स्टार न्जूय के बाद वे सहारा ग्रूप ज्वाइन किये। वहां वे एडिटर-इन-चीफ बने।

उपेंद्र राय उन पत्रकारों मे से एक है जिनकी पकड़ सिर्फ राजनीतिक क्षेत्र में ही नहीं है बल्कि उनकी पकड़ व्यापार और फिल्म जगत में भी बहुत गहरी है। उन्होंने अपने रिपोर्टिंग के दौरान बड़ी से बड़ी खबर ब्रेक किये जो आज भी एक उदाहरण है।

समाचार की दुनिया में उपेंद्र का धमाका उपेंद्र राय ने समाचार की दुनिया में कई न्यूज ब्रेक किये, जो कि पूरी सिस्टम को हिलाकर रख दिया। उस समय वे स्टार न्यूज में थे। उन्हीं में से कुछ बड़ी खबरें हैं जो निम्नलिखित है

1. डीमेट एकाउंट घोटला यह ऐसा घोटाला था जिसमें देश की बड़ी बड़ी फाईनेंस कंपनियां शामिल थी। बड़े बड़े दिग्गज घोटाले में शामिल थे। ये लोग गरीब लोगों के नाम पर फर्जी डीमेट एकाउंट खोल रखे थे और करोड़ो करोड़ रुपये के घोटाले को अंजाम दिया। जब 20 अक्टूबर 2005 को उपेंद्र की यह रिपोर्ट सामने आई उसके बाद, दिल्ली से लेकर मुंबई तक की सारी सरकारी मशिनरी हरकत में आई।

2. देश का सबसे बडा काले धन का खुलासा यह मामला साल 2007 का है। जब साल 2007 के शुरूआत में हीं उपेंद्र राय ने काले धन से संबंधित जबरदस्त न्यूज ब्रेक किया। उन्होंने 5 जनवरी 2007 को घोड़े के कारोबार से जुड़े व्यापारी हसन अली को लेकर जबरदस्त खबर ब्रेक की। यह मामला लगभग 36 हजार करोड़ रूपये काले धन का था। देश-दुनिया से जुड़े 36 हजार करोड के घोटाले का पर्दाफाश जब उपेंद्र ने किया तो सारा देश चकित रह गया। पूरा सरकारी महकमा सकते में आ गया। इतना बड़ा घोटाला देश के सामने पहले कभी नहीं आया था।

3. अभिषेक और ऐश्वर्या की शादी फिल्म जगत के सुपर स्टार अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक बच्चन और विश्व सुंदरी का खिताब जीत चुकी फिल्म हीरोईन ऐश्वर्या राय की शादी को लेकर अटकलों का बाजार गर्म था। मीडिया मे रोजाना विभिन्न प्रकार के खबरे आ रही थी। आखिरकार विवाह की तिथि की पुष्टि भी उपेद्र राय ने ही की। जिस खबर की पुष्टि मीडिया जगत में मनोरंजन टीम की ओर से होनी थी उसे हार्ड कोर पत्रकार उपेंद्र राय ने की। यह उपेंद्र की खबर निकालने की क्षमता को हीं दर्शाता है।

अवार्ड से सम्मानित - उनके जाबांजी रिपोर्टिंग के कारण हीं कई बार उपेंद्र को महत्वपूर्ण पुरूस्कारों से नवाजा गया। 19 जुलाई 2007 को देश का सबसे बढिया टीवी पत्रकार के लिये उन्हें न्यूज टेलीविजन अवार्ड से नवाजा गया। उन्हें शानदार रिपोर्टिंग और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिये लायन गोल्ड अवार्ड से नावाजा गया। इन सबसे पहले उपेद्र को 2006 में स्टार न्यूज एचिवर अवार्ड से नवाजा गया था। ब्रेकिंग न्यूज और शानदार रिपोर्टिंग के लिये लगातार किसी न किसी अवार्ड से सम्मानित किया जाना हीं उनकी शानदार सफलता को दर्शाता है।
व्यक्तिगत संक्षिप्त विवरण - उपेंद्र राय उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के रहने वाले हैं। उनका जन्म 16 जनवरी 1982 को हुआ। वे स्वभाव से मधूर और व्यवहार से दूसरे को मदद करने वाले हैं। उपेंद्र के बारे में कहा जाता है कि वे जब कभी जिस खबर के पीछे पड़ जाते उसके तह तक चले जाते थे। चाहे रिस्क कितना भी बड़ा क्यों न हो। आज वे पत्रकारिता के शिखर पर हैं। सर्वोच्च पद पर हैं।


बहरहाल, यहां तक पहुंचना कोई आसान काम नहीं था। लोहे के चने चबाने के समान था। इस सफर को सफलता पूर्वक सफर करने में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन अंतत: सत्य की जीत हुई। सत्यमेव जयते।

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