भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव का अनशन समाजसेवी अन्ना हजारे के अनशन से बड़ा होगा या नहीं यह सवाल नहीं है। लेकिन खुशी की बात यह है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ देश की जनता धीरे धीरे इकठ्ठा हो रही है। इतना हीं नहीं सत्तापक्ष और विपक्ष दोनो हीं खेमों के नेताओं को चेतावनी दे रही है कि यदि वे नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में वे दरकिनार कर दिये जायेंगे।बहरहाल बाबा रामदेव प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अपील को ठुकराते हुए दिल्ली पहुंच गए हैं। और उन्होंने कहा कि विदेश में रखे काले धन को वापस लाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ 4 जून से अनशन किया जायेगा। केंद्र सरकार पहले यह कह रही थी कि वे दबाव में नहीं आयेंगे। लेकिन आज एयरपोर्ट पर बाबा रामदेव की स्वागत के लिये केंद्र के तीन तीन मंत्री जिसमें कपिल सिब्बल और सुबोध कांत सहाय के अलावा कई अधिकारी मौजूद थे। लग रहा था कि किसी विदेश राजनयीक का स्वागत किया जा रहा है। सरकारी अंदाज से लग जाना चाहिये कि सरकार दबाव में दिखने लगी है।
भारत का काला धन विदेशों में इतना जमा है कि उसके वापस आने से हर गांव में स्कूल, होस्पीटल और छात्रों को स्कॉलरशीप दिया जा सकेगा। इससे भी अधिक धन जमा है। कालेधन को वापस लाने के लिये बाबा रामदेव ने अध्यादेश जारी करने की मांग की है। बाबा रामदेव ने कहा कि प्रधानमंत्री व मुख्य न्यायाधीश को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने की बात उन्होंने नहीं कही है, बल्कि उन्होंने यह कहा है कि यह एक गंभीर विषय है, इस पर बहस होनी चाहिए।
बाबा का अन्ना से मतभेद नहीं –
बाबा रामदेव ने साफ कर दिया है कि समाजसेवी अन्ना हजारे से उनका मतभेद नहीं है। वे दोनों एक दूसरे के साथ हैं। यह आंदोलन बहुत बड़ा होगा।
बहरहाल, भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबाराम देव और समाजसेवी अन्ना हजारे जैसे लोगों हीं लडाई लड सकते हैं। क्योंकि कोई ईमानदार अधिकारी इस लडाई को लडेगा तो नेतागण उन्हें बहुत तकलीफ देते है। कोई आम आदमी इस लडाई को लडेगा तो वे माफियाओं के हाथों मारे जाते हैं। उदाहरण भरे पड़े हैं। लेकिन अब भ्रष्टटाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले ताकतवर समाज सेवियों के मंच एक से दो हो गये हैं। अब इस लड़ाई को मजबूती मिलेगी। देश की आम जनता भ्रष्टाचार से त्रस्त हो चुकी है।

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