सभी राजनीतिक दलें क्यों चुप है? कहा जा रहा है कि समाजसेवी अन्ना हजारे ने जिस जन-लोकापल-बिल की मांग की है उससे कोई भी राजनीतिक दल सहमत नहीं हो सकता। क्योंकि अधिकांश राजनीतिक दलों की जड़े काले धन से हीं सींचती है। राजनीतिक दलें सहमी हुई है। इस बिल के तहत जो प्रस्ताव प्रस्तावित है उससे देश और आम नागरिकों का भला होना तय है। लेकिन भ्रष्ट प्रकार के मंत्री और अधिकारी अपने काले कारनामों को बहुत दिनों तक छुपा कर नहीं रख सकेंगे। उन्हें जेल की हवा बहुत जल्द खाने को मिल जायेगी। इसलिये देश की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी भी चुप है। क्योंकि बीजेपी के नेता भी भ्रष्टाचार के दलदल में धंसे हुए हैं। देश में जिस प्रकार से भ्रष्टाचार का बोलबाला है उससे सभी लोग परेशान हैं। आज उन्हें अपने गुस्से को इजहार करने का मौका मिला है। सरकार और विपक्ष दोनों हीं देख लें कि जब एक ईमानदार व्यक्ति आंदोलन के लिये आगे बढता है तो पूरे देश में लोग कैसे उनके साथ एक साथ उठ खड़े होते हैं।
यह तो शुरूआत है। और यह लड़ाई इंटरनेट के मार्फट भी पूरी दुनिया में लड़ी जा रही है। लिबिया का उदाहरण आपके सामने है। यदि समय रहते आप नहीं संभले तो आने वाले दिनों में एक चिंगारी विकराल रूप ले सकती है। क्रिकेट विश्व कप में जीत के समय जैसे पूरे देश के लोग एक मंच पर आ गये थे उसी प्रकार भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरे देश के लोग एक मंच पर आ रहे हैं। ईमानदार लोगों को मंत्रिमंडल में लायें। अच्छे अधिकारियों को काम करने का मौका दे।
अब आम जनता धर्म और जाति की राजनीति से उपर उठते जा रही है। अब उन्हें समझ आने लगा है कि धर्म के अफिम से नशा हो सकता है लेकिन पेट नहीं भरा जा सकता। बच्चो के लिये स्कूल के इंतजाम नहीं हो सकते। स्वास्थ्य के लिये होस्पीटल की व्यवस्था नहीं हो सकती। यह सब कुछ पाने के लिये संघर्ष करने की जरूरत है।
बहरहाल ईमान का एक पैर आगे बढ चुका है। उसे तोडने की कोशिश की जा रही है और आगे भी की जायेगी। लेकिन इस बार जिस प्रकार से आम जनता ने सडकों पर उतरकर अपना समर्थन दिया है समाज सेवी अन्ना हजारे को। इससे लगने लगा है कि ईमान की जड़े मजबूत होंगी।

0 comments:
Post a Comment