Tuesday, April 5, 2011
जन लोकपाल बिल से क्यों डरे मंत्री, अधिकारी और नेता
भारत को भ्रष्टाचार से बचाने और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ तेज कार्रवाई हो इसके लिये समाजसेवी अन्ना हजारे ने जन लोकपाल बिल लाने की मांग की है। और इस मांग को जोरदार समर्थन दिया है एक जमाने की ईमानदार आईपीएस अधिकारी रहीं किरण बेदी और समाजसेवी स्वामी अग्निवेश ने। इसके लिये समाजसेवी अन्ना हजारे ने दिल्ली के जंतर मंतर पर आमरण अनशन भी शूरू कर दिया है। यहां पर सबसे पहले यह जानिये कि जन लोकपाल बिल क्या है - 1. जन लोकपाल बिल के एक संस्था का गठन होगा जो पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की तरह स्वतंत्र होगा। 2. लोकपाल के सदस्यों का चयन कोई राजनेता नहीं करेगा बल्कि संवैधानिक संस्थाएं, जज और नागरिक मिलकर करेंगे। 3. इसके तहत केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त का गठन होगा। 4. लोकपाल को किसी मंत्री, जज, नेता या अफसर के खिलाफ जांच करने और मुकदमा चलाने के लिए पूरी शक्ति और व्यवस्था होगी। 5. सीबीआई, सीवीसी और विजिलेंस विभाग के ऐंटि-करप्शन विभाग लोकपाल के अंतर्गत आ जायेगा। यह एक पारदर्शी संस्था होगा। 6. भ्रष्ट नेता हो या अधिकारी या जज उनके खिलाफ तेज गति सुनवाई होगी और दो साल के अंदर दोषियों को सजा सुनायेगा जायेगा। 7. दोषी सिद्द होने पर सरकार को जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई उस दोषी से वसूला जायेगा। 8. अगर किसी नागरिक का काम तय समय पर नहीं हुआ तो लोकपाल दोषी अधिकारियो पर जुर्माना लगायेगा जो शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर दिया जायेगा। 9. यदि लोकपाल के किसी अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत मिलती हो तो उसकी जांच दो महीने में पूरी की जायेगी और दोषियों को बर्खास्त कर मुकदमा चलाया जायेगा।
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