Tuesday, April 5, 2011

भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रमक हुए समाजसेवी अन्ना हजारे

दुनिया में भारत का नाम भले हीं उभरते हुए विश्व शक्ति के रूप में लिया जा रहा हो लेकिन हकीकत यह है दुनिया के भ्रष्टतम देशों में भारत का नाम सुमार हो गया है। राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं चाहे वे सत्ता में हो या सत्ता के बाहर सभी काली कमाई में लगे हुए हैं। ऐसे में कोई क्या करे समझ नहीं आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट भी काले धन पर सरकार की चुप्पी को लेकर कड़ी प्रतिक्रियाएं जाहिर कर चुकी है। देश के वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी भ्रष्टाचार को लेकर कहते हैं काले धन को विदेशों से नही लाया जा सकता। ऐसे में सवाल है कि आखिर क्यों नहीं लाया जा सकता। क्योंकि हमाम में सभी नंगे हैं। समाजसेवी अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो आंदोलन छेड़ा है उसे पूरे देश का समर्थन मिलने लगा है। लोग वर्तमान के अधिकांश राजनेताओं के भ्रष्ट आचरण से परेशान हैं। ऐसे में अन्ना हजारे द्वारा लोकपाल बिल में संशोधन की मांग को लेकर अनशन पर बैठना बिल्कुल सही है। अंधे, गुंगे और बहरे नेताओं को सुनाने के लिये यह जरूरी है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और विरोधी दल बीजेपी अन्ना हजारे से अनशन न करने की अपील कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी, विरोधी दल नेता सुषमा जी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया जी और विपक्ष के सबसे बडे कदावर नेता लाल कृष्ण आडवाणी जी आप सोचे जितने लाख करोड का घोटाला हुआ क्या उससे देश के गांवों में स्कूल, कॉलजे, सड़के, हॉस्पीटल, या अन्य बुनियादी सुविधायें नहीं की जा सकती थी। लेकिन आपलोग भ्रष्टाचार के प्रति गंभीर न होकर सिर्फ राजनीति नफा-नुकसान के बारे में सोचते हैं। आपलोगों के उपेक्षापूर्ण और भेदभाव रवैये के कारण हीं नक्सल पैदा होते हैं। वे मजबूरी में हथियार उठाते हैं। ईमानदार अधिकारियों को काम करने नहीं दिया जाता है। उन्हें ईनाम देने की वजाय उनका ट्रांसफर कर दिया जाता है। उन्हें तकलीफ दी जाती है। आप सभी इस भ्रम में कभी न रहें कि भारत विभन्नताओं का देश है इसलिये यहां क्रांति नहीं हो सकती। समाजसेवी अन्ना हजारे को जिस प्रकार से आम लोगो का समर्थन मिल रहा है वे वर्तमान राजनीतिक दलों के भ्रष्ट नेताओं के लिये एक चेतावनी है। इससे लोगों के मन में दबी इच्छाये जागृत होने लगी है। गुस्से का लावा कभी भी फूट सकता है। मुठ्ठी भर भ्रष्ट नेताओं के लिये देश बर्बाद न होने दें। यदि आग की चिनगारी भडकी तो राजनीतिक दलों के भ्रष्ट नेताओं और अधिकारियों को भागने के लिये रास्ते नहीं मिलेंगे। हो सकता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रमक हुए अन्ना हजारी की हत्या करा दी जाये। जैसा कि उन्होंने आशंका जाहिर की है कि उन्हें जान का डर नहीं है। इसे कोई भी अंजाम दिलवा सकता है। सत्ता पक्ष भी हत्या करवा सकता है और सत्ता पक्ष को बदनाम कर खुद सत्ता आने की कोशिश में विरोधी दल भी हत्याकांड को अंजाम दे सकता है। यदि ऐसा हुआ तो वर्तमान भ्रष्ट नेताओं के लिये बहुत भारी होगा आने वाला दिन। जनता उन्हें छोडेगी नहीं।

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